इस परिप्रेक्ष्य में जेम्ज़ मैटिस ने अफ़ग़ानिस्तान के अपने दौरे पर एक दुस्साहसपूर्ण बयान दिया जिसमें उन्होंने दावा किया कि हमने ईरान को सीरिया और यमन में उसके व्यवहार और हौसियों का समर्थन करने के कारण चेतावनी दी है। क्षेत्र में ईरान के उन्हीं के शब्दों में किसी भी दुर्व्यवहार के कारण उसके ख़िलाफ़ कार्यवाही होगी।
अमरीकी रक्षा मंत्री ने ईरान पर जिसने सीरिया और इराक़ में आतंकियों को पराजित करने में वास्तव में मदद की, हस्तक्षेप करने का इल्ज़ाम लगाया और उसके व्यवहार को बुरा कहा। यह ऐसी हालत में है कि अमरीका का कर्मपत्र बहुत सी काली करतूतों से भरा पड़ा है। जैसे ईरान की क़ानूनी सरकार को गिराने के लिए 1953 में कराया गया सैन्य विद्रोह, ईरान पर थोपी गयी जंग में सद्दाम का समर्थन करना, ईरान के यात्री विमान को गिराना और 4 दशकों से ईरान से जारी दुश्मनी।
अमरीकी रक्षा मंत्री के बयान से ज़ाहिर है कि वह ग़लत बातें पेश करके अस्ल मुद्दे से जनमत का ध्यान हटाना चाहते हैं। अमरीका जंगों, आतंकवाद और क्षेत्रीय देशों पर चरमपंथ थोपने के लिए ज़िम्मेदार है जिसकी पृष्ठिभूमि वर्षों पहले क्षेत्र में अमरीका और ब्रिटेन के हस्तक्षेप से वजूद में आयी। इन हस्तक्षेप के नतीजे को अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, सीरिया और दुनिया के दूसरे क्षेत्रों में सुनियोजित रूप में मौजूद आतंकवाद व चरमपंथ के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन अमरीकी अधिकारियों को अपनी काली करतूतों को दूसरों के सिर मढ़ने की आदत पड़ चुकी है। हालांकि अमरीका के ख़िलाफ़ उसके सभी अपराधों, हस्तक्षेप, युद्धोन्माद, अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करने और ग़ैर क़ानूनी पाबंदियां लगाने की वजह से कार्यवाही होनी चाहिए।