अबनाः प्राप्त जानकारी के अनुसार ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने हज की पवित्र यात्रा के अवसर पर हाजियों को पैग़ाम देते हुए कहा कि यह आसमानी आवाज़ हमेशा की तरह दिलों को दावत दे रही है और सदियां बीत जाने के बाद भी मानवता को एकेश्वरवाद के केंद्र पर जमा कर रही है, यह निमंत्रण सबके लिए है और सबके लिए यह सम्मान है, हालाँकि संभव है कि सब इस आवाज़ को न सुन सकें आप इस नेमत को पा रहे हैं और अल्लाह की मेहमानी में आप इस शांत और अमन की घाटी में क़दम रख चुके हैं ,अराफात , मशअर, सफा, मरवा, मस्जिदुल हराम, मस्जिदे नबवी यह सब उन हाजियों के लिए रूहानी बुलंदी का कारण हैं जो हज की मारेफ़त और फलसफे से आगाह है और इस अवसर को अपनी तहारत और पाकीज़गी के लिए इस्तेमाल करते हुए अपनी आख़ेरत का सामान जमा कर रहे हैं ।
एक बिंदु जो हर इंसान को अपनी ओर आकर्षित करता है वह हर साल दुनिया भर के इंसानों को एक केंद्र पर जमा करना है, एक विशेष समय और स्थान का चयन हज के अहम् रहस्यों में से एक है, यह इस्लामी एकता का राज़ और उम्मत के निर्माण का एक रहस्य है जो अल्लाह के घर के निकट होना चाहिए हमेशा हर साल इस स्थान पर हज के आमाल दुनिया भर के मुसलमानों को इत्तेहाद और एकता की दावत देता है जो इस्लाम दुश्मन ताक़तों के एजेंडों के एकदम खिलाफ है जो हमेशा और विशेष रूप से मौजूदा दौर में मुसलमानों को एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए उभारते रहे हैं ।
आप आज साम्रज्यवादी और अपराधी प्रवृत्ति रखने वाले अमेरिका को देखें इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ उसकी अहम् रणनीति युद्ध की आग को भड़काना है उसकी शर्मनाक और निंदनीय कोशिशें मुसलमानो का एक दूसरे के हाथों क़त्ले आम कराना, ज़ालिमों को मज़लूमों और पीड़ितों पर थोपना , अत्याचारियों की सहायता करना , मज़लूमों और पीड़ितों को निर्दयता से कुचलना और हमेशा फसाद की आग को भड़काए रखना है । मुस्लमान होशियार रहें और इस शैतानी साज़िश को नाकाम बना दें, हज इस दूरदर्शिता और बुद्धिमता के रास्ते खोलता है और हज यात्रा में मुशरेकीन और काफिरों से बेज़ारी के नारों का असली फलसफा और लॉजिक यही है । अल्लाह का ज़िक्र हज की रूह है हम रहमत की इस बारिश से अपने दिलों को ज़िन्दगी और ताज़गी दें और अल्लाह पर भरोसे और ऐतेमाद को दिलों की गहराई तक उतार लें, अगर ऐसा हुआ तो हम दुश्मन पर छा जायेंगे ।
सम्मानित एवं आदरणीय हाजियों आप अपनी दुआओं में यमन, फिलिस्तीन, इराक, सीरिया, लीबिया , कश्मीर, पाकिस्तान, म्यांमार, अफ़ग़ानिस्तान,बहरैन और अन्य क्षेत्रों के मज़लूमों पीड़ितों और मुसलमानों को मत भूलियेगा और अल्लाह से दुआ करना कि अमेरिका और उसके अत्याचारी सहयोगियों को उनके अंजाम तक पहुंचाए।
वस्सलाम
सय्यद अली ख़ामेनई
28 मुरदाद 1397 हिजरी शम्सी
19 अगस्त 2018
आयतुल्लाह ख़ामेनई का पैग़ाम हाजियों के नाम
अमरीका की नीति युद्ध भड़काना और मुसलमानों का एक दूसरे के हाथों जनसंहार कराना हैः
20 अगस्त 2018 - 08:34
समाचार कोड: 906163
इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ उसकी अहम् रणनीति युद्ध की आग को भड़काना है उसकी शर्मनाक और निंदनीय कोशिशें मुसलमानो का एक दूसरे के हाथों क़त्ले आम कराना, ज़ालिमों को मज़लूमों और पीड़ितों पर थोपना , अत्याचारियों की सहायता करना , मज़लूमों और पीड़ितों को निर्दयता से कुचलना और हमेशा फसाद की आग को भड़काए रखना है ।