23 नवंबर 2017 - 02:30
 इराक़ एवं शाम में आतंकवादियों के पूर्ण रुप से सफ़ाये के ऐलान के साथ जनरल सुलेमानी ने सुप्रीम लीडर को दी मुबारकबाद

इराक़ और सीरिया की मज़लूम जनता दाइश आतंकियों के ज़ुल्मों के सामने बिल्कुल बेबस होकर घरबार सब कुछ छोड़कर दूसरे क्षेत्रों और देशों की तरफ़ पलायन करने पर मजबूर हो गई थी। और जो न जा सके उनको बेदर्दी से खत्म कर दिया गया।

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना : प्राप्त सूत्रों के अनुसार जनरल क़ासिम सुलेमानी ने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनई के नाम एक महत्वपूर्ण पैग़ाम में इराक़ सीरिया से आतंकवादी संगठन दाइश के पूर्ण रूप से समापन का ऐलान करते हुए रहबरे इंक़ेलाब, सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई एवं सभी उम्मते इस्लामी को मुबारकबाद दी है।
 जनरल सुलेमानी ने लिखा कि लगभग 6 साल पहले अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब अलै. के ज़माने की तरह एक फ़ितना खड़ा किया गया। जिसके पीछे इस्लाम शत्रु विशेषकर अमेरिका और इस्राइल की सहायता से एक फ़ितना पूरे इस्लामी जगत में फैलाने की कोशिश की गई।
यह ख़तरनाक एवं नष्ट करने वाला फ़ितना सभी इस्लामी देशों के मुसलमानों को आपस में लड़ाने के लिए पैदा किया गया था ।और दाइश आतंकवादियों ने शुरुआती महीनों में इराक़ और सीरिया के हज़ारों जवानों को मार दिया, और इन देशों के शहरों और गाँव समैत हज़ारों किलोमीटर तक के क्षेत्रों पर क़ब्जा जमा लिया, और हज़ारों सड़कें, पुल, वर्क शॉप,  फैक्ट्रियां तेल और गैस के बहुत से जखीरे, स्कूल, चिकित्सालय, कृषि भवन और बेसिक ढांचे पूर्ण रुप से बर्बाद कर दिए गए।
 ईराक़ और सीरिया में दाइश आतंकवादियों की ओर से की जाने वाली कार्यवाई में नुक़सान का हिसाब लगाना अत्यंत मुश्किल है। लेकिन एक अंदाज़े के अनुसार कम से कम 500 अरब डालर का सिर्फ माली नुक़सान इन दोनों देशों को पहुंचा है।
 उन्होंने लिखा कि दाइश आतंकवादियों के ज़ुल्म को बयान करना मुम्किन नहीं है। आतंकवादियों ने दरिंदगी की इंतेहा कर दी थी, जैसे छोटे छोटे बच्चों का सर काट देना, जिंदा इंसानो की खाल उतारना, मर्दों को उनके घर वालों के सामने जिंदा जलाना, और जवान लड़कियों को अग़वा करके खरीदना और बेचना इत्यादि।
इराक़ और सीरिया की मज़लूम जनता दाइश आतंकियों  के ज़ुल्मों के सामने बिल्कुल बेबस होकर घरबार सब कुछ छोड़कर दूसरे क्षेत्रों और देशों की तरफ़ पलायन करने पर मजबूर हो गई थी। और जो न जा सके उनको बेदर्दी से खत्म कर दिया गया।
आतंकवादियों ने जिस क्षेत्र में क़दम रखा वहां के सभी पुरानी मस्जिदें, इमाम बारगाहों को बमों से उड़ा दिया गया जिसमें हजारो बेगुनाह नमाज़ी शहीद हो गए।
दाइश आतंकियों ने 6000 से अधिक मुस्लिम नौजवानों को इस्लाम के नाम पर धोखा देकर उनसे हमले करवाए, जिसमें मस्जिदें, मदरसे, चिकित्सालय, मुसलमानों के इस्तेमाल के मर्कज़, फैक्ट्री वगै़रह को निशाना बनाया गया, और इन हमलों में औरतों और बच्चों समेत हजारों मुसलमानों ने को शहीद किया गया।
 इन सभी जु़ल्म के पीछे अमेरिकी सरकार का हाथ था, जैसे कि अभी अमेरिकी (राष्ट्रपति ट्रंप) ने कहा कि दाइश आतंकियों को अमेरिकी पूर्व सरकार ने बनाया था, और अब भी अमेरिकी दाइश आतंकियों की भरपूर मदद कर रहे हैं।
 जनरल सुलेमानी ने कहा है कि इन सभी साज़िशों को नाकाम बनाने में रसूले अकरम स. के तुफ़ैल और हकीमाना हिदायात काम आए और आयतुल्लाह सीस्तानी के फ़तवों की वजह से इस ख़तरनाक फ़ितने को समाप्त कर दिया गया है।
उन्होंने लिखा है कि दाइशी आतंकवादियों को हराने में ईराक़ी हश्दुश्अबी के जवानों समैत दूसरे इस्लामी देशों के जवानों और सैयद हसन नसरुल्लाह के नेत्रत्व ने महत्वपूर्ण रोल अदा किया।
इस्लामी राष्ट्र ईरान के राष्ट्रपति, सरकार, पारलियमेंट के मिम्बर, मंत्री और देश के सभी सिक्योरिटी संगठन तारीफ़ के लायक़ हैं।
जनरल सुलेमान ने पत्र के अंत में कुछ यूं लिखा किः बंदए हक़ीर आप की ख़िदमत में एक सिपाही की हैसियत से ऐलान करता हूं कि सीरिया के क्षेत्र अलबुकमाल की आज़ादी के बाद अब पूरे ईराक़ और सीरिया से दाइश आतंकवादियों का समापन किया जा चुका है। अतः मैं ईराक़, सीरिया, लेबनान, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तानी शहीदों और मुजाहिदीन की नियाबत में जनाबे आली और इस्लामी राष्ट्र ईरान की जनता, इराक़ और सीरिया की मज़लूम जनता और पूर्ण इस्लामी जगत की समक्ष्य मुबारकबाद पेश करता हूं।

सर पर कफ़न बांधे आपका बेटा
क़ासिम सुलेमानी