अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबना: आयतुल्लाह हाशमी रफ़संजानी ने पच्चीस अगस्त 1934 को रफ़संजान प्रांत के बहरमान ज़िले के एक अमीर परिवार मंष जन्म लिया, वह 14 साल की उम्र में क़ुम के धार्मिक केंद्र में पढ़ने के लिए क़ुम चले गए जहां उन्होंने आयतुल्लाह बुरुजर्दी, आयतुल्लाह इमाम खुमैनी और आयतुल्लाह सैयद मोहक़्क़िक़ मीर दामाद, आयतुल्लाह मोहम्मद रेजा गुलपाएगानी और आयातुल्लाह मोहम्मद हुसैन तबातबाई जैसे मशहूर उल्मा के क्लास में शिरकत की।
वह इस्लामी क्रांति के सभी क्षेत्रों में आगे आगे रहे और उन्हें सात बार जेल भी जाना पड़ा, कुल मिला कर साढ़े चार साल तक जेल में रहे लेकिन उनके संघर्ष व प्रतिरोध में कोई कमी नहीं आई।
आयातुल्लाह हाशमी रफसंजानी कई बार ईरान की संसद मजलिसे शूरा-ए-इस्लामी के सभापति और दो बार ईरान के राष्ट्रपति रहे, आयातुल्लाह हाशमी रफसंजानी इसी के साथ साथ लीडरशिप काउंसिल के सदस्यों के चयन हेतु गठित की जाने वाली विशेषज्ञों की परिषद के अध्यक्ष भी रहे, आयतुल्लाह हाशमी रफसंजानी राष्ट्रीय हित समीक्षा परिषद के अध्यक्ष भी रहे हैं।
उन्होंने देश में विभिन्न सामाजिक सेवाएं कीं जिनमें आज़ाद इस्लामिक विश्वविद्यालय की स्थापना की ओर इशारा किया जा सकता है, आयतुल्लाह हाशमी रफसंजानी ने इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद विभिन्न क्रांतिकारी संस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने ईरान में राजनीतिक विकास से अधिक आर्थिक विकास पर जोर दिया, आयतुल्लाह अली अकबर हाशमी रफसंजानी ने कई धार्मिक पुस्तकें लिखी हैं जिनमें तफ़सीरे रहनुमा एक मूल्यवान किताब है जो लगभग 20 भागों में हैं।
आयतुल्लाह हाशमी रफसंजानी अनंततः रविवार 8 जनवरी सन 2017 को तेहरान के समयानुसार 19 बजकर 30 मिनट पर दिल की धड़कन बंद होने के कारण एक अस्पताल में इस दुनिया से कूच कर गए, उनका अंतिम संस्कार मंगलवार 10 जनवरी सन 2017 को इमाम ख़ुमैनी के मज़ार में होना तय पाया है।
10 जनवरी 2017 - 06:37
समाचार कोड: 803977
वह इस्लामी क्रांति के सभी क्षेत्रों में आगे आगे रहे और उन्हें सात बार जेल भी जाना पड़ा, कुल मिला कर साढ़े चार साल तक जेल में रहे लेकिन उनके संघर्ष व प्रतिरोध में कोई कमी नहीं आई