जमीअते उल्मा-ए-पाकिस्तान के प्रमुख ने करबला में इमाम हुसैन अ. के चेहलुम के अवसर पर मुसलमानों की करोड़ों की संख्या में भागीदारी ने आतंकवादी समूहों के होश उड़ा दिये हैं और उनके हौसले पस्त हो गये हैं।
रिपोर्ट के अनुसार जमीअते उलमा-ए-पाकिस्तान के प्रमुख मौलाना डॉ साहबज़ादा अबुल ख़ैर मोहम्मद जुबैर ने इरना के साथ बातचीत में इस साल इमाम हुसैन अ. के चेहलुम के अवसर पर मुसलमानों की दो करोड़ से अधिक भागीदारी को इस्लामी समुदाय की एकता और शक्ति का महान सूचक बताते हुए उसे आतंकवादियों के लिए गम्भीर खतरा बताया याहे।
उन्होंने कहा कि करबला में इमाम हुसैन अ. के आशिक़ों की इतनी बड़ी संख्या की मौजूदगी इस बात को दर्शा रही है कि इस्लामी उम्मत आतंकवादियों की किसी भी साज़िश से भयभीत नहीं होगी।
उन्होंने कहा चूंकि सैयदुश्शोहदा हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, अहलेबैते अतहार (अ) में से है इसलिए इमाम हुसैन अ. का उद्देश्य व लक्ष्य भी पैग़म्बर स.अ की रेसालत की जिम्मेदारियों का सिलसिला था और आपने शांति व दोस्ती और इंसानों के बीच एकता के प्रचार के लिए उपाय अंजाम दिए।
उन्होंने कहा कि इस साल इमाम हुसैन अ. के चेहलुम के अवसर पर करोड़ों ज़ाएरीन की भागीदारी ने आतंकवादी समूहों ख़ास कर आईएसआईएस और उनके समर्थकों को यह संदेश दिया है कि वह जान लें कि मुसलमानों की एकता को पारा नहीं किया जा सकता और इस्लामी समुदाय किसी भी कीमत पर आतंकवादियों के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे।
18 दिसंबर 2014 - 17:38
समाचार कोड: 659204
जमीअते उल्मा-ए-पाकिस्तान के प्रमुख ने करबला में इमाम हुसैन अ. के चेहलुम के अवसर पर मुसलमानों की करोड़ों की संख्या में भागीदारी ने आतंकवादी समूहों के होश उड़ा दिये हैं और उनके हौसले पस्त हो गये हैं।