2 नवंबर 2014 - 18:48
इस्राईल ने फ़िलिस्तीनियों को इंसानी ढ़ाल के तौर पर इस्तेमाल किया।

मानविधकार संगठन यूरो-मिड ऑब्ज़र्वर ने ग़ज़्ज़ा पट्टी पर गर्मी के मौसम में इस्राईल के सैन्य हमले के दौरान पकड़े गए फ़िलिस्तीनियों को मानव ढाल बनाने के कारण इस्राईल को उत्तरदायी ठहराया है।

अबनाः मानविधकार संगठन यूरो-मिड ऑब्ज़र्वर ने ग़ज़्ज़ा पट्टी पर गर्मी के मौसम में इस्राईल के सैन्य हमले के दौरान पकड़े गए फ़िलिस्तीनियों को मानव ढाल बनाने के कारण इस्राईल को उत्तरदायी ठहराया है।
इस संगठन ने ग़ज़्ज़ा पर हमलों के दौरान इस्राईल की बर्बरता पर आधारित एक रिपोर्ट जारी की। इस्राईल का यह हमला 8 जुलाई को शुरु हुआ था और मिस्र की मध्यस्थता वाले संघर्ष विराम के साथ ही 26 अगस्त को ख़त्म हुआ। यूरो मिड संगठन के अधिकारी एहसान आदिल ने कहा,“ हमारी जांच में इस्राइली सैनिकों के नागरिकों पर अंधाधुंध हमलों और उनके द्वारा पकड़े गए फ़िलिस्तीनियों को मानव ढाल बनाए जाने की घटना शामिल है।” यूरो मिड मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीक़ा क्षेत्र में मानवाधिकार के मामलों पर निगरानी करने वाली ग़ैर सरकारी संस्था है।
इस रिपोर्ट में आया है, “ अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के अनुसार जब सैन्य ठिकानों पर हमले न हों तो ऐसे हमले अंधाधुंध माने जाते हैं। लड़ने वालों और आम नागरिकों के बीच अंतर को स्पष्ट करने वाले तथा अधांधुंध हमलों के दुष्प्रभाव को कम करने वाले क़दम नहीं उठाए गए।”
इसी प्रकार इस रिपोर्ट में आया है कि इस्राईली सैनिकों ने ग़ज़्ज़ा में जान बूझकर आम लोगों को बड़ी संख्या में निशाना बनाया। जनेवा स्थित इस ग़ैर सरकारी संस्था ने दक्षिणी नगर ख़ान यूनुस में ऐसे छह मामले सुबूत के तौर पर पेश किए हैं जहां इस्राइली सैनिकों ने आम फ़िलिस्तीनियों को मानव ढाल के रूप में प्रयोग किया।
ज्ञात रहे ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेश्नल सहित अनेक मानवाधिकार संगठन इस्राइली शासन को ग़ज़्ज़ा में युद्ध अपराध का दोषी ठहरा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार पिछले कुछ साल के दौरान ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल द्वारा थोपे गए युद्ध के दुष्परिणाम के कारण ग़ज़्ज़ा के लगभग 4 लाख बच्चों को मनोवैज्ञानिक देखभाल की ज़रूरत है।