12 अगस्त 2014 - 18:45
इराक़ के सेंजार इलाक़े से 80 हज़ार लोगों ने किया पलायन।

इराक़ के सेंजार क्षेत्र से 80000 लोगों ने दोहूक प्रांत की ओर पलायन किया है। पलायन के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था ने बताया है कि इराक़ के कुर्दिस्तान प्रांत के सेंजार क्षेत्र से पहाड़ों के माध्यम से ईज़दी समुदाय के 80000 लोगों ने दोहूक की ओर पलायन किया है।

अबनाः इराक़ के सेंजार क्षेत्र से 80000 लोगों ने दोहूक प्रांत की ओर पलायन किया है। पलायन के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था ने बताया है कि इराक़ के कुर्दिस्तान प्रांत के सेंजार क्षेत्र से पहाड़ों के माध्यम से ईज़दी समुदाय के 80000 लोगों ने दोहूक की ओर पलायन किया है। इस संस्था के एक अधिकारी ने बताया है कि ईज़दी समुदाय के लोग जो, दाइश के भय से सेंजार के पर्वतों में फंस गए थे पिछले चार दिनों से पलायन करके दोहूक पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह क्रम आगे भी जारी रहेगा।
इसी बीच दोहूक के गवर्नर हाउस ने घोषणा की है वर्तमान समय में हमारे यहां दस लाख से अधिक पलायनकर्ता पहुंचे हैं जो इस प्रांत की क्षमता से बहुत अधिक है। इसमें विश्व समुदाय से मांग की गई है कि वह ईज़दी समुदाय तथा अन्य पलायनकर्ताओं की सहायता के लिए आगे आए।
ज्ञात रहे कि लगभग एक सप्ताह पहले कुर्दिस्तान के पीशमर्गा बलों के पीछे हटने के कारण दाइश के आतंकवादियों ने उत्तरी इराक़ के सेंजार और रबीआ नगरों पर नियंत्रण हासिल कर लिया था। उसके बाद इन नगरों में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को नष्ट करने के बाद इन अल्सपसंख्यकों की हत्या करने की धमकी दी थी। दाइश के आतंकवादियों की धमकियों के भय से ईज़दी समुदाय के हज़ारों लोग अपने घरबार छोड़कर भाग गए थे जिन्होंने पहाड़ों में शरण ली जहां पर खाने और पानी की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग मर गए थे।
दूसरी ओर आतंकवादी संगठन दाइश की धमकी के बारे में तुर्की के ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि वे इसे गंभीरता से नहीं लेते। तानर पिलदीज़ ने कहा है कि अतातुर्क बांध को तोड़ने और इस्तांबूल पर हमला पर आधारित दाइश की धमकी को अंकारा गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने कहा कि तुर्की, फ़ोरात नदी के पानी के बारे में वार्ता में इराक़ को अपना सहयोगी मानता है।
इससे पहले दाइश ने घोषणा की थी कि अगर तुर्की, अतातुर्क बांध का पानी, फ़ुरात नदी के लिए नहीं छोड़ता है तो इस्तांबूल पर हमला किया जा सकता है।
ज्ञात रहे कि तुर्की ने 1990 के दशक में इस देश के दक्षिणी क्षेत्रों में कुछ बांध बनाकर इराक़ और सीरिया के लिए दजला और फ़ुरात के लिए जाने वाले पानी को नियंत्रित कर रखा है। तुर्की की यह कार्यवाही पिछले दो दशकों से इराक़ और सीरिया से उसके जल-विवाद का कारण बनी हुई है।