ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल के हमलों की निंदा में वैज्ञानिकों और डाक्टरों ने खुला ख़त लिखा।
विश्व के चौबीस डाक्टरों और वैज्ञानिकों ने ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल के जारी हमलों और महिलाओं व बच्चों सहित निर्दोष लोगों के विरुद्ध किए जा रहे, बयान से बाहर अपराध की कड़े शब्दों में निंदा पर आधारित एक खुले ख़त पर दस्तख़त किए जो 22 जुलाई को द लैंसेट में प्रकाशित हुआ।
इस ख़त पर दस्तख़त करने वालों में इटली के जेनोओ विश्वविद्यालय में जेनेटिक्स की प्रोफ़ेसर पाउला मैनडूचा, सर लेन शाल्मर, लंदन के किंग्स कालेज के इंस्टीट्यूट आफ़ साइकेट्री के प्रोफ़ेसर डेरेक समरफ़ील्ड, उत्तरी नार्वे के यूनिवर्सिटी हास्पिटल में क्लिनिक आफ़ इमरजेन्सी विभाग के प्रमुख मैडस गिलबर्ट जैसी हस्तियां शामिल हैं।
ख़त में लिखा है, “ हम अपने सहकर्मियों, अनुभवी एवं युवा प्रोफ़ेशनलों से इस्राईल के इस हमले की भर्त्सना की अपील करते हैं। हम उस प्रोपैगंडे को चुनौती देते हैं जो तथा-कथित रक्षात्मक आक्रमण के नाम पर जनसंहार को छिपाने के लिए आपात स्थिति के जन्म को उचित ठहराता है। वास्तव में यह असीमित अवधि, तीव्रता व हद पर आधारित बर्बरतापूर्ण हमला है। ”
प्रोफ़ेसर समरफ़ील्ड ने द हिन्दु के पत्रकार से टेलीफ़ोन पर कहा, “ वे जब चाहते हैं जान से मारते हैं किन्तु इस्राईल के बारे में कुछ नहीं कहा जाता। इस्राईल को पश्चिम ने विशेष दर्जा दे रखा है। इस्राईल पश्चिमी व्यवस्था का तात्विक रूप से भाग है। इस अपराध में पश्चिम की मिलीभगत है।”
इस ख़त में चौबीस वैज्ञानिकों की दृढ़ भावना इस वाक्य से स्पष्ट होती है, “ आतंकवादियों के दंडित करने के बहाने ग़ज़्ज़ा के नागरिकों पर सैनिक हमले से हम हक्काबक्का हो गए हैं। यह ग़ज़्ज़ा पर 2008 से तीसरा व्यापक स्तर पर सैनिक हमला है। हर बार राजनैतिक दलों और अतिग्रहण तथा थोपी गयी नाकाबंदी का प्रतिरोध करने वालों के सफ़ाए के लिए इस्राईल के अस्वीकार्य बहाने से ग़ज़्ज़ा में मृतकों की संख्या निर्दोष लोगों विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के मारे जाने से बढ़ी।”
यह बात समझ में आने वाली है कि छोटे ही सही किन्तु प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की ओर से घोर भर्त्सना को इस्राइली वैज्ञानिकों ने व्यापक स्तर पर शेयर नहीं किया।
इस ख़त में आगे आया है,“ हम निराशा के साथ यह लिख रहे हैं कि केवल पांच प्रतिशत इस्राईल के विद्वान सहकर्मियों ने ग़ज़्ज़ा पर सैन्य कार्यवाही को रोकने के लिए अपनी सरकार से अपील पर दस्तख़त किए। हम यह निष्कर्ष निकालने पर बाध्य हुए कि इन पांच प्रतिशत के इलावा पूरे इस्राईली विद्वान ग़ज़्ज़ा की तबाही और जनसंहार में सहापराधी हैं।”
23 जुलाई 2014 - 23:30
समाचार कोड: 626287
विश्व के चौबीस डाक्टरों और वैज्ञानिकों ने ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल के जारी हमलों और महिलाओं व बच्चों सहित निर्दोष लोगों के विरुद्ध किए जा रहे, बयान से बाहर अपराध की कड़े शब्दों में निंदा पर आधारित एक खुले ख़त पर दस्तख़त किए जो 22 जुलाई को द लैंसेट में प्रकाशित हुआ।