बहरैन के वरिष्ठ मौलाना आयतुल्लाह ईसा क़ासिम ने नमाज़े जुमा के ख़ुतबों में कहा कि हम अपने देश से प्यार करते हैं और उसकी तरक़्की चाहते हैं लेकिन बहरैन को मानवधिकार के अरब कोर्ट के सेंटर के रूप में चुना जाना देश के भीतर मानवाधिकारों के हनन को और भी बढ़ावा देगा क्योंकि यह फ़ैसला ऐसी स्थिति में किया गया है कि जब बहरैन में शाही सरकार शहरियों के अधिकारों का खुला हनन कर रही है, उनके विरुद्ध जालिमाना फ़ैसले सुना रही है और बच्चों और जवानों को क़त्ल कर रही है।
आयतुल्लाह ईसा क़ासिम ने सरकार से बातचीत को बेफायदा बताते हुए कहा कि एसी बातचीत का कोई फ़ायदा नहीं है जो केवल मीडया के प्रोपगंडे के लिए हो।
1 जून 2014 - 17:54
समाचार कोड: 612890
आयतुल्लाह ईसा क़ासिम ने सरकार से बातचीत को बेफायदा बताते हुए कहा कि एसी बातचीत का कोई फ़ायदा नहीं है जो केवल मीडया के प्रोपगंडे के लिए हो।