الامام علیؑ : العِلمُ عِلمانِ: عِلمٌ لا یَسَعُ النّاسَ الَّا النَّظَرُ فیہِ وھُوَ صِبغَةُ الاِسلامِ، و عِلمٌ یَسَعُ النّاسَ تَرکُ النَّظَرِ فیہِ و ھُوَ قُدرَةُ اللہِ
इमाम अली ( अलैहिस्सलाम ) : इल्म दो प्रकार का होता है , एक वह , कि जिस को प्राप्त करना लोगों के लिये आवश्यक है , और इस्लाम की शोभा है , और दूसरा वह , कि जिस को छोड़ देने की लोगों को अनुमति है , और वह ख़ुदा की क़ुदरत है ।