19 अगस्त 2013 - 19:30
मफ़ातीहुल ह़यात

एक बहुत ही अहेम और क़ीमती किताब जो कि इस साल महान आलिमे दीन ह़ज़रत आयतुल्लाह जवादी आमुली के क़लम से लिखी गई है। और जिसका ईरान मे पब्लिक की तरफ़ से बहुत ज़्यादा स्वागत हुआ है। और अब तक उसकी लाखों कापियां बिक चुकी हैं, उसका नाम मफ़ातीहुल ह़यात है

एक बहुत ही अहेम और क़ीमती किताब जो कि इस साल महान आलिमे दीन ह़ज़रत आयतुल्लाह जवादी आमुली के क़लम से लिखी गई है। और जिसका ईरान मे पब्लिक की तरफ़ से बहुत ज़्यादा स्वागत हुआ है। और अब तक उसकी लाखों कापियां बिक चुकी हैं, उसका नाम मफ़ातीहुल ह़यात है। आयतुल्लाह जवादी आमुली का मानना है कि जिस तरह़ शेख़ अब्बास क़ुम्मी रह़मतुल्लाह अलैह ने मफ़ातीहुल जेनान लिखी जिसका मतलब जन्नत की कुंजियाँ हैं और यह इंसान के आध्यात्मिक और ह्रार्दिक सम्बंध को अल्लाह से जोड़ने के अलावा दुआवों और मुनाजात की किताब कहलाती है लेकिन मफ़ातीहुल ह़यात नामक किताब इंसान के ख़ुद अपने और लोगों से सम्पर्क को उजागर करती है इस किताब की हर घर में सख़्त ज़रूरत महसूस की जा रही थी।यह किताब अल्लाह की पसंदीदा और पाकीज़ा ज़िन्दगी बिताने का तरीक़ा सिखाती है और आयात और रिवायात तथा दीनी शिक्षाओं के आधार पर हमें यह सबक़ देती हैं कि ज़िन्दगी किस तरह से गुज़ारें? इस किताब में सोच, विचार, सीखना व सिखाना, काम व कोशिश, सुबह जल्दी उठने के फ़ायदे, प्रशासनिक मामले, हेल्थ केयर और ज़िन्दगी को सुखद बनाने के सिद्धांत, सोने जागने के सिद्धांत, घूमने फिरने, मनोरंजन करने, रिश्तेदारों से व्यवहार के तरीक़े, माँ बाप के साथ नेकी और रिश्ते के बंधन का ख़्याल, बच्चों की ट्रेनिंग के सिद्धांत, खाने पीने के सिद्धांत, कपड़े पहनने के संस्कार, सजने सवंरने और श्रंगार, ज़िन्दगी गुज़ारने की जगह और रहने के सिद्धांत, और सफ़र के संस्कार, बच्चों की ट्रेनिंग, पति या पत्नी का चयन तथा दूसरे मुसलमानों के साथ ज़िंदगी बिताने के तरीक़े, इसी तरह़ ग़ैर मुस्लिमों और पड़ोसियों तथा बुद्धिजीवियों और बीमारों के साथ व्यवहार के तरीक़े मेहमानदारी व अतिथि-सत्कार और यतीमों, बड़ों और ग़रीबों के साथ ज़िन्दगी बिताने के तरीक़े, कर्ज़ लेने और देने के सिद्धांत, बंदियों और क़ैदियों के अधिकार, मज़दूरों और मालिकों, कारीगरों मिस्त्रीयों जनता व शासकों, इस्लाम के आर्थिक मुद्दे, पैदावार और विभाजन, जानवरों के अधिकारों के सिलसिले में ज़िम्मेदारियाँ, पर्यावरण और प्रकृति तथा जंगलों व बाग़ों व पार्कों, घूमना फिरना और पर्यटन आदि के बारे में कर्तव्य व क़ानूनों को आयात व रिवायात और दीनी शिक्षाओं के आधार पर बयान किया गया है। जो इस बात को बयान करता है कि दीने इस्लाम कितना संपूर्ण, मुकम्मल और व्यापी है जो इंसानी आवश्यकताओं के सभी पहलुओं पर नज़र रखे हुए है।इसी लिए मुनासिब यह है कि यह किताब हर घर में रखी जाये और लड़कियों की शादी के मौक़े पर क़ुरआन और दुआवों की किताब के साथ उसको भी जहेज़ में दिया जाये ताकि वह उस किताब की स्टडी द्वारा दीनी और इस्लामी सिद्धांतों को अपना कर अपनी वैवाहिक ज़िन्दगी को बेहतर बनायें।वस्सलाममहदी महदवी पुर