29 जुलाई 2013 - 19:30
कड़ी सुरक्षा में निकला गिलीम का ताबूत

19 रमज़ान को सुब्ह की नमाज़ में हज़रत अली अ. के सर पर तलवार से हमले और उनके घायल होने के शोक में सआदत गंज, लखनऊ स्थित मस्जिदे कूफ़ा से ऐतिहासिक गिलीन के ताबूत का जुलूस आज़ादारों के मातम के बीच बहुत ही श्रद्धा व सम्मान के साथ निकाला गया।

19 रमज़ान को सुब्ह की नमाज़ में हज़रत अली अ. के सर पर तलवार से हमले और उनके घायल होने के शोक में सआदत गंज, लखनऊ स्थित मस्जिदे कूफ़ा से ऐतिहासिक गिलीन के ताबूत का जुलूस आज़ादारों के मातम के बीच बहुत ही श्रद्धा व सम्मान के साथ निकाला गया। जुलूस मस्जिदे कूफ़ा से जैसे ही बाहर निकला वैसे ताबूत की ज़ियारत के लिये हज़ारों की संख्या में खड़े अज़ादार या अली मौला, हैदर मौला की सदाओं के साथ मातम करने लगे। इस दौरान सभी की आँखों से आँसू जारी थे और वह अपने इमाम पर हुए अत्याचार का ग़म मना रहे थे। जुलूस अपने ऐतिहासिक रास्ते से होता हुआ पाटा नाला स्थित इमाम बाड़े की तरफ़ बढ़ने लगा। जुलूस को सुरक्षा बलों नें अपने घेरे में ले रखा था। जुलूस के साथ मरसिया ख़ान मरसिया पढ़ते हुए चल रहे थे। जुलूस में मौजूद हर आदमी की यही तमन्ना था कि वह किसी तरह से ताबूत का बोसा लेकर जन्नत के जवानों इमाम हसन अ. व इमाम हुसैन अ. को उनके बाबा हज़रत अली अ. का पुर्सा दे सकें। जुलूस के पूरे रास्ते में अज़ादार सड़कों के दोनों तरफ़ ताबूत की ज़ियारत के लिये खड़े थे और जैसे ही उनकी निगाह ताबूत पर पड़ती थी तो वह अपने आँसू नहीं रोक पाते थे। जुलूस धीरे धीरे अपनी मंज़िल की तरफ़ बढ़ता रहा और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने ऐतिहासिक रास्ते से होता हुआ पाटानाला स्थित इमाम बाड़े में पहुँच कर सम्पन्न हुआ।