26 जुलाई 2013 - 19:30
मिलियन मार्च के सही होने या न होने पर मुफ़्तियों में मतभेद

इख़वानुल मुस्लेमीन और वहाबियों के आध्यात्मिक बाप यूसुफ़ क़रज़ावी जो कई बार मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी के विरुद्ध जनरल अलसीसी के क़दम को फ़ौज की बग़ावत का नाम देकर उसे हराम कह चुका है

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार इख़वानुल मुस्लेमीन और वहाबियों के आध्यात्मिक बाप यूसुफ़ क़रज़ावी जो कई बार मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी के विरुद्ध जनरल अलसीसी के क़दम को फ़ौज की बग़ावत का नाम देकर उसे हराम कह चुका है, आज जुमे के दिन जनरल अलसीसी की तरफ़ से फ़ौज के समर्थन में जनता के मिलियन मार्च करने को हराम कहते हुए कहा कि जनरल अलसीसी के कहने पर लोगों का सड़कों पर निकलना और फ़ौज का समर्थन करना हराम है।क़रज़ावी जिसे उसके पूर्व चरित्र की वजह से नाटो का मुफ़्ती कहा जाता है, कई सालों से क़तर में शरण लिये हुए है। क़रज़ावी नें अलजज़ीरा टी. वी. चैनल से बात चीत करते हुए पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी के विरुद्ध अल-सीसी के आदेश की आलोचना की और लोगों का मिस्र की सड़कों पर फ़ौज के समर्थन में निकलना हराम बताया।उधर मिस्र की इस्लामी यूनिवर्सिटी के प्रमुख अहमद अल तय्यब नें मिस्र के सरकारी टी. वी. चैनल से बयान जारी करते हुए कहा कि अलअज़हर मिस्र की सारी जनता से मांग करती है कि बिना किसी हिंसा के फ़ौज के समर्थन में सड़कों पर निकल आएं।शेख़ अल अज़हर नें कहा कि जैसा कि फ़ौज के जनरल नें जुमे के दिन जनता को एकता के साथ सड़कों पर आने की दावत दी है, हम भी उनकी दावत का समर्थन करते हैं और जनता के सड़कों पर निकलने को वाजिब और ज़रूरी समझते हैं।शेख़ अल तय्यब नें यह बयान ऐसे समय में जारी किया है जब अलअज़हर के ही कुछ बुज़ुर्ग शेख़ नें अहमद अलशेख़ का विरोध कर के जनरल अलसीसी के समर्थन में प्रदर्शन करने को ग़लत और हराम बताया है।