4 मई 2013 - 19:30
आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी द्वारा हज़रत "हुज्र इब्ने अदी" के मज़ार के गिराए जाने की निंदा।

फिर इस्लामी दुनिया में एक दर्दनाक घटना घटी है और वहाबी आतंकवादियों ने पैगम्बर (स.अ) के एक महान सहाबी और हज़रत अली (अ) के वफादार साथी हुज्र इब्ने अदी (रज़) के मज़ार पर हमला किया है...

मरजा-ए-तक़लीद आयतुल्लाहिल उज़्मा मकारिम शीराज़ी ने अपने एक बयान में कहा है कि एक बार फिर इस्लामी दुनिया में एक दर्दनाक घटना घटी है और वहाबी आतंकवादियों ने पैगम्बर (स.अ) के एक महान सहाबी और हज़रत अली (अ) के वफादार साथी हुज्र इब्ने अदी (रज़) के मज़ार पर हमला किया है और उनके मज़ार को ध्वस्त कर दिया है, दिल के अंधे आतंकवादियों ने क़ब्र खोद कर उनके पाक जिस्म का अपमान किया है। आयतुल्लाहिल उज़्मा मकारिम शीराज़ी ने कहा है कि हज़रत हुज्र इब्ने अदी आबिद, जाहिद और बहादुर इंसान थे उन्होंने अपने युग में बनी उमय्या के अत्याचारों के खिलाफ आंदोलन किया और बनी उमय्या के बेरहम शासकों के हाथों दमिश्क के निकट (मर्जुल अज़रा) नामक स्थान पर शहीद औऱ वही दफ्न हुये।आयतुल्लाहिल उज़्मा मकारिम शीराज़ी ने अपने बयान में कहा है कि हज़रत हुज्र इब्ने अदी के मज़ार को ध्वस्त करने वाले दरिंदों की इतिहास में कोई मिसाल नहीं मिलती, क्योंकि यह न ज़िंदों पर दया करते हैं और न मिट्टी में दफ़्न शहीदों पर, और अगर उन्हें हुकूमत मिल गई तो यह पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. के गुंबद और बारगाह को भी ध्वस्त कर देंगे, क्योंकि यह कई बार इशारों इशारों में यह कह चुके हैं, केवल मुसलमानों के डर से अभी तक ऐसा नहीं कर सके हैं। आयतुल्लाहिल उज़्मा मकारिम शीराज़ी के बयान में ज़ोर देकर कहा गया है कि हम इस घोर अपराध की निंदा करते हैं और बता देना चाहते हैं कि इस्लामी समाज ख़ास कर शिया इस अपराध को कभी भूलेंगे नही और यह दिल के अंधे आतंकवादी जल्द ही अपनी इस कार्रवाई की सजा पाएंगे।बयान में कहा गया है कि हम आतंकवादियों के समर्थक, तुर्की, सऊदी अरब और कतर से लेकर अमेरिका और इस्राइल तक यह बता देना चाहते हैं कि तुम्हें शर्म आनी चाहिए क्योंकि तुम जिसका समर्थन कर रहे हैं, उन्होंने वह अमानवीय और ग़ैरइंसानी काम अंजाम दिया है जो किसी तरह भी इंसानियत के अनुकूल नहीं है। बयान के अंत में इस बात का खुलासा किया गया है कि हम जानते हैं कि इस्लामी दुश्मन जिनका नेतृत्व अमेरिका और इस्राईल कर रहे हैं, वह अपने समर्थकों को ऐसे अपराधों को अंजाम देने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, ताकि मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक जंग शुरू की जा सके लेकिन हमें विश्वास है कि इस्लामी मुल्कों के अंदर होने वाली इस्लामी जागरूकता की बदौलत वह अपनी साजिश में सफल नहीं हो सकेंगे।