1 मई 2013 - 19:30
अमेरिका के कहने और करने में अंतर है।

इंटर-नेशनल एटमिक एनर्जी एजेंसी में ईरान के प्रतिनिधि ने कहा है कि इस्राईल फ़ाइल सिक्योरिटी काउंसिल में स्थानांतरित की जानी चाहिए क्योंकि इस्राईल एनपीटी का सदस्य देश नहीं है और उसने एनपीटी के सदस्य देश सीरिया पर हमला किया है इसलिए फ़ाइल सिक्योरिटी काउंसिल में ले जानी चाहिए....

इंटर-नेशनल एटमिक एनर्जी एजेंसी में ईरान के प्रतिनिधि ने कहा है कि इस्राईल फ़ाइल सिक्योरिटी काउंसिल में स्थानांतरित की जानी चाहिए क्योंकि इस्राईल एनपीटी का सदस्य देश नहीं है और उसने एनपीटी के सदस्य देश सीरिया पर हमला किया है इसलिए फ़ाइल सिक्योरिटी काउंसिल में ले जानी चाहिए।प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार इंटर-नेशनल एटमिक एनर्जी एजेंसी में ईरान के प्रतिनिधि अली असगर सुल्तानिया ने एनपीटी के समझौते पर पुनर्विचार की शुरूआती बैठक को संबोधित करते हुए कहा है कि इस्राईल फ़ाइल सिक्योरिटी काउंसिल में स्थानांतरित की जानी चाहिए क्योंकि इस्राईल एनपीटी का सदस्य देश है और उसने एनपीटी के सदस्य देश सीरिया पर हमला किया है इसलिए फ़ाइल सिक्योरिटी काउंसिल में ले जानी चाहिए।अली असगर सुल्तानिया ने मिडिल ईस्ट को एटमी हथियारों से ख़ाली करने पर बल देते हुए कहा कि ईरान पूरी दुनिया से एटमी हथियारों को नष्ट करने की मांग करता है क्योंकि यह हथियार इंसानियत के लिये बड़ा खतरा हैं।उन्होंने कहा कि इंटर-नेशनल कानून केवल कमजोर देशों के लिए ही क्यों हैं वह ज़ोर ज़बर्दस्ती करने वालों और साम्राज्यवादी ताक़तों पर क्यों लागू नहीं होते हैं। और रही बात अमरीका की तो उसके कहने और करने में बहुत अंतर है।