एक रिवायत के हिसाब से जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. की शहादत की तारीख़ 13 जमादिउल अव्वल है और दूसरी रिवायत के हिसाब से 3 जमादिउस्सानी है। इसलिये यह 20-21 दिन दुनिया भर में “फ़ातिमी दिनों” के नाम से मनाए जाते हैं और बीबी ज़हरा स. की ज़िन्दगी के बारे में मजलिसें, सेमिनार, कांफ़्रेंसे और दूसरे प्रोग्राम किये जाते हैं। इन दिनों के अनुसार हम भी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनाई के बयान की रौशनी में बीबी की ज़िन्दगी के बारे में कुछ बातें प्रस्तुत कर रहे हैं।हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. के बारे में जितना ज़्यादा लिखा और बोला जाए कम है क्योंकि हम पूरी तरह से उनको पहचान नहीं सकते और बयान नहीं कर सकते बल्कि सच तो यह है कि हमें यह भी नहीं मालूम कि उनके बारे में क्या कहा जाए और कैसे कहा जाए। नुबूव्व्त और विलायत के इस निचोड़ की छोटी सी ज़िन्दगी में इतना कुछ है जो हमारे समझ से बहुत ऊपर है, जिसके बारे में सोचकर बड़े बड़े इन्सान केवल सोचते रह गए हैं लेकिन उन्हें समझ नहीं सके हैं। अगर हमें उनकी ज़िन्दगी को और उनके व्यक्तित्व व शख़्सियत और विशेषता को समझना है तो हमें मासूम ज़बानों से मदद लेना होगी। हमें यह देखना होगा कि रसूले इस्लाम हज़रत मुहम्मद स.अ उनके बारे में क्या कहा करते थे। बीबी के बारे में उन्होंने जो फ़रमाया है उसके एक एक शब्द पर हमें विचार करना होगा तब कहीं जाकर हम थोड़ा बहुत उनको समझ सकते हैं। अक्सर ऐसा हुआ है कि हिस्ट्री में जो बड़े लोग गुज़रे हैं उन्हें उनके ज़माने में नहीं समझा गया लेकिन हज़रत ज़हरा स. वह हैं जिन्हें उनके ज़माने के महान इन्सानों नें पहचाना और उनके बारे में दूसरों को भी बताया, वह कौन थे? वह रसूलल्लाह स. थे, वह हज़रत अली अ. थे, वह इमामे हसन और इमामे हुसैन अ. थे। या वह लोग जो बीबी को जानते थे जैसे जनाबे फ़िज़्ज़ा, जनाबे सलमान और दूसरे लोग उन्होंने आपके गुण गाए हैं। अगर आप उन किताबों को देखें जिनको सुन्नी उल्मा नें बीबी ज़हरा स. के बार में लिखी हैं तो आपको उनकी फ़ज़ीलतों व श्रेष्ठताओं का एक समंदर नज़र आएगा। आपको रसूलुल्लाह स. की पाक ज़बान से निकलने वाली हदीसें नज़र आएंगी जो आपने जनाबे फ़ातिमा स. के बारे में कहीं हैं। बहुत सी ऐसी हदीसें भी हैं जो रसूलुल्लाह की बीवियों नें बयान की हैं। जैसे हज़रत आएशा की एक हदीस है जिसमें आप फ़रमाती हैं: ’’واللہ مارأیت فی سمتہ و ھدیہ اشبہ برسول اللہ صلی اللہ علیہ و آلہ و سلم من فاطمہ ‘‘ख़ुदा की क़सम! मैंने शक्ल, सूरत, विशेषताओं में रसूलुल्लाह जैसा अगर किसी को देखा है तो वह फ़ातिमा स. हैं।’’ و کان اذا دخلت الیہ ، اذا دخلت علی رسول اللہ قامت قام الیھا‘‘जब भी फ़ातिमा स. रसूलुल्लाह स. के पास आती थीं तो आप अपनी जगह से खड़े हो जाते थे और उनकी ओर बढ़ते थे। यहाँ ’’قام الیھا‘‘ का क्या मतलब है? इसका मतलब यह नहीं कि वह केवल अपनी जगह से खड़े हो जाते थे बल्कि खड़े होने के बाद पूरे आदर के साथ उनकी ओर जाते थे। या कुछ हदीसों में हज़रत आयशा ही की ज़बानी ऐसा भी आया है:’’ و کان یقبلھا و یجلسھا مجلسۃ‘‘उनको चूमते थे और पूरे सम्मान के साथ उन्हें अपनी जगह बैठाते थे। क्या आपनें किसी बाप को इस तरह अपनी बेटी का आदर करते देखा है? क्या आपने किसी बाप को अपनी बेटी को इस तरह सम्मान करते हुए देखा है? फिर रसूलुल्लाह जैसा इन्सान जिनके बारे में क़ुरआने मजीद फ़रमाता है कि यह जो भी करते हैं अल्लाह के हुक्म से करते हैं, अगर अपनी बेटी का आदर करें और उसे सम्मान दें तो वह बेटी कितनी महान होगी? उसकी श्रेष्ठता के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता।मेरे दोस्तों! मेरे प्यारों! यहाँ सवाल यह है कि हमने जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. को कितना जाना है? हमनें उन्हें कितना समझा है? आप हिस्ट्री उठाकर देखें बीबी के चाहने वालों नें उनको पहचानने के लिये काफ़ी कोशिश की है, उनसे जितना काम इस संबन्ध में हो सकता था उन्होंने उतना किया है। हालांकि जितने अच्छे हालात आज हैं उस समय नहीं थे। ख़ुदा का शुक्र है कि आज (ईरान में) इस्लामी शासन है। हर तरफ़ क़ुरआन की और अहलेबैत अ. की बातें हैं। आज हम खुलकर अहलेबैत अ. के बारे में बातें कर सकते हैं। जिस ज़माने में मिस्र में फ़ातिमियों की हुकूमत थी उन्होंने वहाँ जनाबे फ़ातिमा स. के नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाई (जो आज अल ज़हरा यूनिवर्सिटी के नाम से मशहूर है) आज जब हमारे पास अवसर है तो हमें भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए काम करना चाहिये और अहलेबैत अ. का मैसेज दुनिया तक पहुँचाना चाहिये हालांकि इसके लिये ज़रूरी है कि पहले हम ख़ुद जानें कि अहलेबैत अ. कौन थे? उनका मैसेज क्या था? उनका रास्ता क्या था? और वह किस तरह हमारे लिये और सारी दुनिया के लिये आईडियल बन सकते हैं? (आज के दिनों में जो कि जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. के दिन हैं हमारे पास अच्छा टाईम है कि हम उनकी ज़िन्दगी और उनके मैसेज के बारे में पढ़ें, उसे समझें, उनमें अपनी समस्याओं का इलाज ढ़ूंढें और फिर उस मैसेज को दुनिया के दूसरे लोगों तक पहुँचाएं क्योंकि बीबी केवल हमारे लिये नहीं बल्कि सारी दुनिया के लोगों के लिये आईडियल हैं।
13 अप्रैल 2013 - 19:30
समाचार कोड: 409006
नुबूव्व्त और विलायत के इस निचोड़ की छोटी सी ज़िन्दगी में इतना कुछ है जो हमारे समझ से बहुत ऊपर है, जिसके बारे में सोचकर बड़े बड़े इन्सान केवल सोचते रह गए हैं लेकिन उन्हें समझ नहीं सके हैं। अगर हमें उनकी ज़िन्दगी को और उनके व्यक्तित्व व शख़्सियत और विशेषता को समझना है तो हमें मासूम ज़बानों से मदद लेना होगी............