3 अप्रैल 2013 - 19:30

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा शेख जाफ़र सुबहानी ने हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन शेख नम्र बाक़िर अल-नम्र के खिलाफ निराधार आरोप लगा के मुकदमा चलाने वाले सऊदी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा........

अहलेबैत (अ.) समाचार एजेंसी अबनाः हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा शेख जाफ़र सुबहानी ने हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन शेख नम्र बाक़िर अल-नम्र के खिलाफ निराधार आरोप लगा के मुकदमा चलाने वाले सऊदी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा: यह सब पर रौशन है कि यह आरोप, अदालत व न्याय से दूर हैं उनसे आदिवासी बू आती है।हज़रत आयतुल्लाह सुबहानी आज अपने क्लास के दौरान पैगम्बर (स.) की इस हदीस की तरफ़ इशारा करते हुए जिसमें रसूले इस्लाम (स.अ) ने फरमाया:" من سمع رجلا منادی یا للمسلمین و لم یجبه فلیس بمسلم' जो इंसान किसी मुसलमान की गुहार को सुने और उसकी मदद को न पहुंचे वह मुसलमान नहीं है, कहा: सऊदी मुसलमानों के बीच आयतुल्लाह शेख नम्र बाक़िर अल-नम्र की ज़िंदगी उनके सुधारक होने पर बेहतरीन तर्क है।उन्होंने कहा: यह मुजाहिद धर्मगुरु चाहता है देश में शांति हो, लेकिन इस शर्त के साथ कि शियों पर अत्याचार न किया जाए, शिया को दूसरे दर्जे का नागरिक न समझा जाए।मरजा-ए-तक़लीद ने कहा: अब ऐसे इंसान पर जिसके सारे जीवन में सिवाये डर, संयम, शिक्षा और भाषण देने के अलावा कुछ नहीं है जासूसी का आरोप लगाते हैं सब जानते हैं कि यह आरोप निराधार हैं।हज़रत आयतुल्लाह सुबहानी ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि इतिहास में भी नबियों व वलियों पर भी ऐसे आरोप लगाये जाते रहे है कहा रसूले ख़ुदा (स.) पर विश्वासघात का आरोप लगाया गया, झूठा और जादूगर कहा गया लेकिन कुछ भी साबित नहीं कर पाए लेकिन यही बात पैगम्बर इस्लाम (स.) के इन आरोपों से मुक्त होने का प्रमाण है और आप का जीवन इतना अच्छा व पवित्र था कि वह किसी अन्य नैतिक बुराई से आपका सम्पर्क न जोड़ सके।उन्होंने कहा ऐसे ही आरोप आयतुल्लाह शेख़ नम्र और अन्य 16 उल्मा, विद्वानों, चिकित्सकों और इंजीनियरों पर लगाये जा रहे हैं जो सभी शिया हैं। स्पष्ट है कि यह सब निराधार आरोप हैं, उनका अदालत से कोई सम्बंध नहीं है उनसे आदिवासी बू आती है।हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सुबहानी ने सऊदी अधिकारियों को नसीहत करते हुए कहा: मैं इसी मिम्बर से सऊदी अधिकारियों को नसीहत करता हूँ कि तुम लोग आज तक अत्याचार और बर्बरता के रास्ते पर चलते रहे हो जिसका कोई परिणाम नहीं हुआ एक बार अपनी इस कार्यविधि को बदल कर देख लो अदालत और नैतिकता के रास्ते पर चलकर देख लो, शियों के साथ भी न्याय और उनके अधिकारों का सम्मान करके भी देख लो कि इसका नतीजा मिलता है कि नहीं।उन्होंने अंत में स्पष्ट कियाः क्यों तुमने साम्राज्यवाद का रास्ता अपना रखा है एक बार अम्बिया और औलिया के रास्ते पर भी चलकर देख लो, मुझे आशा है कि हमारी नसीहतें उनके कानों तक पहुंचेंगी।