13 जनवरी 2013 - 20:30

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा में गुरुवार को हुए आतंकवादी बम धमाकों में शिया समुदाय के क़रीब सौ लोगों के शहीद होने के बाद पाकिस्तान में व्यापक जनाक्रोश व्याप्त है .....

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा में गुरुवार को हुए आतंकवादी बम धमाकों में शिया समुदाय के क़रीब सौ लोगों के शहीद होने के बाद पाकिस्तान में व्यापक जनाक्रोश व्याप्त है और समस्त पाकिस्तान में विशाल प्रदर्शनों के अलावा क्वेटा में शहीद होने वालों के परिजनों सहित हज़ारों लोगों ने केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा का आश्वासन दिये जाने तथा शहर को सेना के हवाले किये जाने तक शवों को दफ़नाने से इनकार कर दिया था।
क्वेटा में पिछले चार दिनों से हज़ारों शिया मुसलमान कफ़न में लिपटी लाशों के साथ कड़ाके की सर्दी में खुले में बैठे हुए थे और उनका कहना था कि जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं मान लेती वह धर्ने पर बैठे रहेंगे।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ ने प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगों को स्वीकार करते हुए सोमवार की सुबह बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री को बर्ख़ास्त कर दिया और शिया समुदाय को सुरक्षा प्रदान करने का आश्वास्न दिया।
पाकिस्तान के शिया अल्पसंख्यक समुदाय में सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। क्योंकि पाकिस्तान में तालेबान और अल-क़ायदा के सहयोगी चरमपंथी वहाबी गुट शिया समुदाय को निशाना बनाते रहते हैं।
क्वेटा में किये गए आतंकवादी बम धमाकों की ज़िम्मेदारी एक चरमपंथी वहाबी गुट लश्करे झंगवी ने ली थी।
लश्करे झंगवी पाकिस्तान के उन सबसे हिंसक वहाबी चरमपंथी समूहों में से एक है जो अधिकतर शिया समुदाय को अपनी पाश्विक कार्यवाहियों का निशाना बनाता है।
इस गुट का नाम चरमपंथी वहाबी नेता हक़ नवाज़ झंगवी के नाम पर है।
हक़ नवाज़ झंगवी ने लंबे समय तक पाकिस्तान में आतंकवादी कार्यवाहियों का दिशा निर्देशन किया।
हक़ नवाज़ झंगवी पाकिस्तान के एक दूसरे आतंकवादी गुट सिपाहे सहाबा के संस्थापकों में से भी एक था। अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि सिपाहे सहाबा ने ही पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा और शियों के ख़िलाफ़ आतंकवादी हमले शुरू किए।
पाकिस्तान के इतिहास पर शोध करने वालों का कहना है कि देश में 1980 से 1985 के बीच जनरल ज़िया उल हक़ के शासन में तथा सऊदी अरब के सहयोग से चरमपंथ का उदय हुआ।
अस्तित्व में आने के दस सालों के अंदर-अंदर सिपाहे सहाबा में फूट पड़ गई और वर्ष 1996 में लश्करे झंगवी रियाज़ बसरा के नेतृत्व में टूट कर अलग हो गया।
पाकिस्तान में सिपाहे सहाबा और लश्करे झंगवी जैसे चमरपंथी गुटों का मूल उद्देश्य शियाओं के विरुद्ध आतंकवादी कार्यवाहियां अंजाम देना है।
लश्करे झंगवी, तालेबान और अल-क़ायदा का सहयोगी गुट माना जाता है।
तालेबान और लश्करे झंगवी दोनों ही अति कट्टरपंथी देवबंदी विचारधारा का अनुसरण करते हैं।
तालेबान के साथ निकट संबंधों के कारण ही सिपाहे सहाबा और लश्करे झंगवी के आतंकवादी सदस्य तालेबान वर्चस्व वाले क्षेत्रों में पनाह लेते हैं।
पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसियों के अनुसार लश्कर ऐ झंगवी के कई प्रशिक्षण कैम्प तालेबान और अल-क़ायदा के नेतृत्व में चल रहे हैं।
ग़ौरतलब है कि सन् 2001 के अगस्त महीने में पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य शासक जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने कई चरमपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था जिनमे लश्करे झंगवी प्रमुख गुट था।