10 जनवरी 2013 - 19:59

ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने क़ुम के हजारों क्रांतिकारी और मज़हबी लोगों की भीड़ को सम्बोधित करते हुए ईरानी साल के देई महीने की 19वीं तारीख़ में क़ुम की पब्लिक के आंदोलन को मुबारक, निर्णायक और अल्लाह के सच्चे वादों के पूरा होने का उदाहरण बताया

ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने क़ुम के हजारों क्रांतिकारी और मज़हबी लोगों की भीड़ को सम्बोधित करते हुए ईरानी साल के देई महीने की 19वीं तारीख़ में क़ुम की पब्लिक के आंदोलन को मुबारक, निर्णायक और अल्लाह के सच्चे वादों के पूरा होने का उदाहरण बताया
और दुश्मनों की गतिविधियों, पालीसियों ख़ासकर अगले साल ख़ुरदाद महीने में होने वाले इलेक्शन के लिए दुश्मन की साजिशों के मुक़ाबले में डटे रहने, सावधानी और जागरूकता पर ज़ोर देते हुए इलेक्शन के बारे में अधिकारियों, ख़ास और आम लोगों, मीडिया और चुनाव में नामित होने वाले लोगों की ज़िम्मेदारियों के बारे में  अहेम प्वाइंट्स बयान किये।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने इंक़ेलाब के दौरान और मौजूदा तीन दशकों में होने वाली घटनाओं और 19 देई के इंक़ेलाब जैसी यादगार घटनाओं से सबक लेने की ताकीद हुए कहा कुछ लोग शाह की घमंडी और तानाशाह सरकार पर कामयाबी और अमेरिका की वर्चस्ववादी और ज़ालिम सरकार के अपमान भरे चंगुल से रिहाई को मुश्किल और कठिन मानते थे, लेकिन अल्लाह की मदद और कृपा से शाह की शैतानी सरकार इतिहास के कचरे में फेंक दी गई और इस्लामी रिपब्लिक ईरान और ईरानी क़ौम ने अमेरिका के सामने पूरी तरह से आज़ादी हासिल कर ली। और दूसरी क़ौमों की आँखों में ईरानी क़ौम का नाम और इस्लामी सिस्टम गर्व करने योग्य बन गया है।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने हालिया तीन दशकों में उपलब्धियों और कामयाबियों को अल्लाह के वादों के पूरा होने का प्रतीक और कुरआन की कई आयतों का हवाला देते हुए फरमाया: निश्चित रूप से अल्लाह की मदद और सहायता उचित समय पर मोमिन, अडिग, सावधान और जानकार क़ौमों को हासिल हो जाती है और यह अल्लाह तआला की अटल और न बदलने वाली सुन्नत है और अल्लाह की इसी सुन्नत के आधार पर 
ईरानी क़ौम इस चरण में और दूसरे चरणों में अपने दुश्मनों पर कामयाब हो जाएगी।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने दुनिया में ईरानी क़ौम के सही लक्ष्यों, साफ और पारदर्शी बातचीत और लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए स्कीम की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अगर ईरान की प्यारी क़ौम, और साहसी जवान, प्रतिरोध के साथ अपनी राह पर अग्रसर रहेंगे तो बेशक अल्लाह की सच्ची सुन्नत के आधार पर और मुनासिब समय में उनके सभी क़ौमी, दीनी और आलमी नारे अमली हो जाएंगे और इतिहास की राह बदल जाएगी और हज़रत वली अस्र (अ.ज) के ज़ुहूर के लिये रास्ता तय्यार हो जाएगा।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने ईरान के खिलाफ पाबंदी लगाने और ईरानी पब्लिक को तंग करने के लिए साम्राज्यवादी सरकारों के बीच एकता और सहयोग की ओर इशारा करते हुए कहा साम्राज्यवादी ताक़ते पहले के मुक़ाबले में आज खुल कर यह क़ुबूल कर रहे हैं कि आर्थिक पाबंदियों का मक़सद ईरानी क़ौम को तंग और परेशान करना है ताकि वह इस्लामी रिपब्लिक ईरान के सामने खड़े हो और ईरानी अधिकारियों को आकड़ों 
में तब्दीली लाने पर मजबूर करें।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने कहा लेकिन ईरान के लोगों के रुझान में इस्लाम के सिद्धांतों, इंक़ेलाब और ईरानियों के नेशनल सम्मान में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है और यह काम दुश्मन की इच्छा के बिलकुल विपरीत है।
ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने ईरानी क़ौम के साथ साम्राज्यवादी ताक़तों के मुक़ाबले में प्रभावी कारकों की समीक्षा में पब्लिक की होशियारी और जागरूकता को बहुत ही जरूरी क़रार देते हुए कहा: हमें समाजी तौर पर तक़वा और हर मौक़े पर जागरूकता और सावधानी के साथ दुश्मन की साज़िशों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और किसी ऐसी समस्या को वुजूद में न लाएं जो हमें दुश्मन से ग़ाफ़िल बना दे। हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने अधिकारियों, प्रकाशन और इंटरनेट साइटों के ज़िम्मेदार लोगों को बार बार की जाने वाली ताकीदों और सिफारिशों की ओर ध्यान दिला कर उन्हें गलत और आंशिक समस्याओं से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा सभी सिफारिशों का मक़सद केवल यह है हम सब का ध्यान दुश्मन की ओर होना चाहिए ताकि हमें मालूम हो कि दुश्मन किस लक्ष्य और मक़सद के पीछे है।
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने दुश्मन की साज़िशों और लक्ष्यों को समझने के लिए होशियारी पर ज़ोर देते हुए कहा कि दुश्मन की गति और गफ्तार 'से पता चलता है कि उसने अपना ध्यान पांच महीने बाद ख़ुरदाद महीने (1392) में ईरान में होने वाले चुनावों पर केंद्रित कर रखा है।
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने राष्ट्रपति चुनाव के ग्यारहवें चरण के बारे में दुश्मनों और विदेशों के पालीसियो और तकनीक की ओर इशारा करते हुए कहा दुश्मन सबसे पहले चुनाव आयोजित न होने के लिए कोशिश करेगा लेकिन उन्हें पता है कि ऐसा होने वाला नहीं है इसलिए उन्हें इस सिलसिले में बिल्कुल निराशा हो रही है।
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इस संबंध में कहा: एक बार कुछ लोगों ने कोशिश की कि चुनाव में अगर हो सके तो दो सप्ताह के लिए देर कर दी जाये लेकिन हमने ताकीद की कि चुनाव एक दिन भी देर से नहीं होना चाहिए और यही कारण है कि चुनाव बिल्कुल अपने समय पर होंगे और दुश्मन के लिए यह रास्ता बिलकुल अवरोधित और बंद है।
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने दुश्मन की तरफ़ से पब्लिक को इलेक्शन में हिस्सा लेने से रोकने और निराश करने के लिए दुश्मन के स्पष्ट लक्ष्य और बाधा डालने की ओर इशारा करते हुए कहा हो सकता है कुछ लोग सहानुभूति और हमदर्दी के साथ चुनाव के बारे में राय दे, लेकिन सभी को इस बात पर ध्यान रखना चाहिए कि कहीं उनके किसी कदम से दुश्मन की साज़िश को मदद न मिले।
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने आज़ाद चुनाव की बार बार रट लगाने वाले लोगों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह सबको मालूम है कि चुनाव आज़ाद होने चाहिए। क्या पिछले तीन दशकों में हुए चुनाव आज़ाद नहीं थे? कौन से मुल्क में ईरान से ज़्यादा आज़ाद चुनाव आयोजित होते हैं? आप होशियार रहें, कहीं आपकी यह बातें इलेक्शन में पब्लिक में निराशा पैदा होने का कारण न बन जाएं।
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने अपनी स्पीच में इलेक्शन में दुश्मन की स्कीमों को मदद पहुंचाने वाले तरीकों की ओर इशारा करते हुए कहा: कौन से मुल्क में उम्मीदवारों की क्षमताओं के बारे में जाँच नहीं की जाती है? आप क्यों इस मसले पर इतना जोर दे रहे हैं इसलिए ताकि पब्लिक के मन में यह बात बैठ जाए कि इलेक्शन में हिस्सा लेने से कोई फायदा नहीं है?
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इस दायरे में जानबूझ के या अनजाने में हरकत करने वाले लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लापरवाही का कभी शिकार नहीं होना चाहिए और दुश्मन की तालिका को भरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इलेक्शन की सेहत के बारे में संदेह व शक डालने वाले लोगों की कड़ी आलोचना करते हुए उनके इस क़दम को उन कामों में गिना जो दुश्मन की स्कीमों को मदद पहुंचाते है।
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने बल देते हुए कहा: मैं भी इसी बात पर ज़ोर देता हूं कि इलेक्शन को पूरी तरह सही और सालिम और अमानतदारी के साथ आयोजित होना चाहिए और सरकार और गैर सरकारी अधिकारियों को कानून के अनुसार और तक़वा और सदाचार के साथ सही चुनाव कराने चाहिए और निश्चित तौर पर ऐसा ही होगा।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने सही व सालिम चुनाव कराने के लिए संविधान में मौजूद बेहतरीन व सर्वश्रेष्ठ पालीसियों और तरीकों की ओर इशारा करते हुए कहा संविधान के तरीकों की पाबंदी वास्तव में सालिम चुनाव आयोजित कराने की वास्तविक गारंटी है। मगर यह कि कुछ लोग अवैध तरीकों का सहारा लें जैसा कि कुछ लोगों ने सन 1388 हिजरी शम्सी के चुनाव में गैर कानूनी तरीके अपनाये मुल्क और क़ौम के लिए संकट और समस्याएं पैदा की और अपने लिए भी दुनिया और आख़ेरत में शर्मिंदगी और बदबख़ती व दुर्भाग्य का बंदोबस्त कर लिया।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इलेक्शन में दुश्मन के वास्तविक लक्ष्य में मदद और सहायक तरीक़ों की व्याख्या में पब्लिक की चुनाव में कमरंग भागीदारी कोबयान करते हुए कहा हो सकता है कुछ लोग चुनाव में कोई दुर्घटना या कोई आर्थिक, राजनीतिक या सुरक्षा से संबंधित मुश्किल पैदा कर लोगों का ध्यान बटाना चाहें क्योंकि यह दुश्मन की स्कीमों में शामिल है लेकिन मुझे इत्मीनान है कि ईरानी पब्लिक बहुत सावधान और दूरदर्शी क़ौम है और दुश्मनों की मक्कारी और धोखे को नाकाम बना देगी।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने अगले राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों के बारे में बताया सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने चुनाव में भागीदारी को पब्लिक का अधिकार और ज़िम्मेदारी बताते हुए कहा इस्लामी रिपब्लिक सिस्टम और इस्लामी कानून पर यक़ीन रखने वाला हर इंसान चुनाव में इस अधिकार का इस्तेमाल करेगा और अपनी ज़िम्मेदारी का पालन करेगा और कुछ लोग चुनाव में प्रतिभा की समीक्षा करेंगे और अपनी क्षमताओं को पब्लिक के सामने आज़माएँगे।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने मुल्क के संचालन को गंभीर और मुश्किल बताते हुए कहा कि प्रशासनिक काम कोई मामूली और आसान काम नहीं है बल्कि यह काम बहुत ही मुश्किल काम है जो उच्च स्तर के प्रबंधन के काधों पर डाला जाता है इसलिये ऐसे लोग राष्ट्रपति उम्मीदवार बनें जो अपने भीतर ऐसी क्षमता और एनर्जी महसूस करें और प्रशासनिक काम जानते हों।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इसी सिलसिले में कहा हो सकता है कुछ लोग दूसरी जगहों पर काम में व्यस्त हों और न जानते हों कि प्रशासनिक काम कितना मुश्किल है इसलिए ऐसे लोगों को राष्ट्रपति चुनाव में नामित होना चाहिये जो प्रबंधन और मैनेजमेंट की क्षमता रखते हों।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने फरमाया: ऐसे लोग राष्ट्रपति उम्मीदवार बनें जो गंभीर काम को अंजाम देने की क्षमता रखते हों और संविधान में जो कौशल व क्षमताएं शर्त है उन पर भी पूरे उतरते हों जिनकी गार्जियन काउंसिल समीक्षा लेगी।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा राष्ट्रपति उम्मीदवारों को वास्तविक रूप से इस्लामी सिस्टम और मौलिक क़ानूनों से लगाव रखना चाहिए और उनमें संविधान को लागू करने की भावना होनी चाहिए क्योंकि राष्ट्रपति इस बारे में क़सम खाता और शपथ लेता है और स्वाभाविक रूप से झूठी क़सम नहीं खानी चाहिए।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने अपनी स्पीच के आख़िर में अगले इलेक्शन के बारे में ताकीद करते हुए कहा इन्शा अल्लाह और अल्लाह के फज़्ल और करम से अगले साल ख़ुरदाद महीने में शानदार राष्ट्रपति चुनाव आयोजित होंगे।
सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने क़ुम की पब्लिक के बीच इंक़ेलाब से पहले और इंक़ेलाब के बाद क़ुम की पब्लिक के निर्णायक और प्रभावी कार्रवाई की ओर इशारा करते हुए कहा उन्नीस देई की घटना को भुलाना नहीं चाहिए क्योंकि इस तरह की घटनाओं के बयान से नई पीढ़ी अपने अतीत के इतिहास से परिचित और आशना होती है।
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