हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शिराज़ी ने गंडे तावीज़ करने से परहेज़ की ताकीद करते हुए ख़ुराफ़ात को मनुष्य की बुद्धि और तर्क को निष्क्रिय बना देने वाला बताया।प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, क़ुम के मरजए तक़लीद हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शिराज़ी ने कुरान की तफ़सीर की सिलसिलेवार बैठक में जो पिछले दिनों हज़रत मासूमए क़ुम (स) के हरम में शबस्तान इमाम खुमैनी (रह) में आयोजित हुई पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से मनक़ूल हदीस के आईने में हज़रत ख़दीजा के फ़ज़ायल बयान किये।उन्होंने यह कहते हुए कि कुछ लोग पैग़म्बरे इस्लाम की पत्नियों का स्थान समझने में ग़ल्ती कर गए हैं कहा बिना शक और संदेह हज़रत खदीजह (स) पैग़म्बरे इस्लाम की पत्नियों में सबसे आगे हैं और उनका स्थान सबसे उच्च है, इस्लाम की यह प्रतिष्ठित महिला कुछ ऐसे गुणों की मालिक थी जो नबी (स.) की बीवियों में से किसी के पास नहीं थे।कुरआन के प्रसिद्ध मुफ़स्सिर ने कहा: आप पहली वह महिला हैं जो इस्लाम लाईं, यह फज़ीलत किसी और पत्नी को प्राप्त नहीं थी, दूसरे यह कि आपके पास जो कुछ भी था सबका सब आपने राहे ख़ुदा, इस्लाम और पैगंबर (स.) में खर्च कर दिया जबकि किसी और के लिए हमें इस तरह के त्याग की बातें नहीं मिलती।उन्होंने यह बताते हुए कि ख़ुराफ़ात व अन्धविश्वास मनुष्य की बुद्धि और तार्किकता को निष्क्रिय कर देता है कहा जब बुद्धि और तार्किकता निष्क्रिय हो जाएं तो समाज बहुत बड़े खतरे से रूबरू होता है, ख़ुराफ़ात व अन्धविश्वास कई बुरे काम को इंसान की निगाहों में अच्छा दिखा कर पेश करता है, परिणाम स्वरूप ख़ुराफ़ात; शिर्क और शिर्क से दूषित विचारों को पोषण देता है।समाचार समाप्त......166
2 अगस्त 2012 - 19:30
समाचार कोड: 334012
हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शिराज़ी ने गंडे तावीज़ करने से परहेज़ की ताकीद करते हुए ख़ुराफ़ात और अन्धविश्वास को मनुष्य की बुद्धि और तर्क को निष्क्रिय बना देने वाला बताया۔۔۔۔۔۔۔