26 जुलाई 2012 - 19:30

म्यान्मार के हालिया जातीय व धार्मिक हिंसा में बचने वाले एक व्यक्ति ने बताया है कि इस देश के पश्चिमी भाग में रोहिंग्या मुसलमानों का जनसंहार, और महिलाओं के साथ ब्लात्कार व्याप्त है......

म्यान्मार के हालिया जातीय व धार्मिक हिंसा में बचने वाले एक व्यक्ति ने बताया है कि इस देश के पश्चिमी भाग में रोहिंग्या मुसलमानों का जनसंहार, और महिलाओं के साथ ब्लात्कार व्याप्त है। ज़ैनुल आबेदीन नामक इस व्यक्ति ने इस्लामी गणतंत्र ईरान प्रसारण के बंग्ला रेडियो से विशेष साक्षात्कार में बतायाः म्यान्मार के प्रशासन ने रख़ाइन के केन्द्र सितवे सहित थांडवे, रामरी और क्योक्फ़ू क़स्बों में दस जून को संध्या से लेकर भोर तक का कर्फ़्यू लगाया। सरकारी अधिकारियों ने पहले तो जुमे की नमाज़ पढ़ने से मना किया और फिर पांबदी बढ़ाते हुए मुसलमानों को मस्जिदों में किसी प्रकार के धार्मिक संस्कारों को अंजाम देने से रोक दिया। ज़ैनुल आबेदीन ने बताया कि म्यान्मार की पुलिस ने पवित्र रमज़ान आरंभ होते ही चार इमामों को गिरफ़्तार कर उन्हें अज्ञात स्थान ले गई कि जिनकी स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है और उन्हें गंभीर यातना दिए जाने की प्रबल आशंका है। म्यान्मार के इस रोहिंग्या मुसलमान ने बताया कि जिन लोगों को सरकारी सैनिक पकड़ कर ले गए हैं उन्हें अवश्य मार डाला होगा।  ज़ैनुल आबेदीन नामक रोहिंग्या मुसलमान ने बतायाः चरमपंथी बौद्धधर्मियों ने रख़ाइन में कम से कम 1 हज़ार मुसलमान युवतियों के साथ ब्लात्कार किया। हज़ारों शवों को क्षेत्र की एक नहर में फेंक दिया गया और लगभग 25 से 30 हज़ार मुसलमान लापता हैं। ज़ैनुल आबेदीन ने बताया कि रख़ाइन के बौद्धधर्मियों ने पहले एक महिला के शरीर को मुसलमानों के एक गांव के पास फेंका और फिर उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों पर इस महिला की हत्या का आरोप लगा कर एक बस पर आक्रमण कर कम से कम दस व्यक्तियों को हताहत कर दिया। वास्तव में रख़ाइन के बौद्धधर्मियों ने महिला की हत्या कर उसके शरीर को इसलिए मुसलमानों के गांव के निकट फेंका था ताकि इस बहाने से अपने षड्यंत्र को व्यवहारिक कर सके। ज़ैनुल आबेदीन ने कहा कि म्यान्मार की सरकार चरमपंथी बौद्धधर्मियों का साथ दे रही है और पुलिस रोहिंग्या के मुसलमानों से रख़ाइन राज्य छोड़ने के लिए कह रही है। ज्ञात रहे म्यान्मार में मुसलमान लगभग 7 वीं ईसवी शताब्दी से रह रहे हैं किन्तु म्यान्मार की सरकार उन्हें म्यानमार का नागरिक नहीं मानती। समाचार समाप्त......166l