11 फ़रवरी 2011 - 20:30

जो लोग ओलमा पर तरह-तरह के आरोप लगाते हैं उन्हे ऐसे आरोप लगाने से पहले पूरी तरह से जानकारी ज़रूर हासिल कर लेनी चाहिये ....

मशहूर आलिमे दीन और मदरस-ए-नाज़मिया के सरपरस्त मौलाना हमीदुल हसन साहब ने 12 फ़रवरी को मौलाना हैदर महदी (र.अ.) की पहली बरसी की मजलिस को इमामबाड़ा ग़ुफ़रॉन मआब में सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर ओलमा के बीच कोई मतभेद हो तो उसे बातचीत से हल किया जाना चाहिये और जो लोग ओलमा पर तरह-तरह के आरोप लगाते हैं उन्हे ऐसे आरोप लगाने से पहले पूरी तरह से जानकारी ज़रूर हासिल कर लेनी चाहिये और इसका सबसे अच्छा रास्ता आपसी बातचीत है और जो लोग इस तरह के आरोप लगाते हैं उन्हे यह ज़रूर सोच लेना चाहिये कि उनके इस क़दम से कहीं कुछ लोग कारे ख़ैर से न रूक जाएं और इसका गुनाह उनके सर न आ जा आए। मौलाना ने यह भी कहा कि हर दौर में लोग ओलमा के मुख़ालिफ़ रहे हैं लेकिन फिर भी ओलमा ने अपने काम को बख़ूबी अन्जाम दिया है। उन्होने मौलाना हैदर महदी (र.अ.) के संक्षिप्त जीवन का वर्णन करते हुए कहा कि मरहूम ने मदरस-ए-जामिया तुज़्ज़हरा की नीव रखकर हमारी बच्चियों पर बहुत बड़ा एहसान किया है क्योंकि शायद इससे पहले हिन्दुस्तान में लड़कियों की आला दीनी तालीम का कोई इन्तेज़ाम नहीं था और मरहूम ने इस कमी को शिद्दत से महसूस करते हुए लखनऊ में जामिया तुज़्ज़हरा के नाम से पहला मदरसा क़ाएम किया, जोकि बहुत ही कठिन और क़ाबिले तारीफ़ काम है।  
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