20 दिसंबर 2011 - 20:30

बहरैन के स्वतंत्रता आंदोलन के महासचिव सईद अश्शहाबी ने बताया है कि सत्ताधानी आले ख़लीफ़ा शासन को पतन से बचाने के लिए विदेशी विशेष रूप से ब्रिटेन का प्रतिनिधिमंडल बहरैन की यात्रा कर रहा है...

बहरैन के स्वतंत्रता आंदोलन के महासचिव सईद अश्शहाबी ने बताया है कि सत्ताधानी आले ख़लीफ़ा शासन को पतन से बचाने के लिए विदेशी विशेष रूप से ब्रिटेन का प्रतिनिधिमंडल बहरैन की यात्रा कर रहा है।
अश्शहाबी ने अलआलम टीवी चैनल से विशेष साक्षात्कार में बताया कि बहरैन में सऊदी सेना की जनता को दबाने में विफलता के पश्चात विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने मनामा की यात्रा की है। उन्होंने कहा कि बहरैन में क्रान्तिकारी बल अपने प्रदर्शन को जारी रखने का संकल्प लिए हुए है और यह क्षेत्र के राजनैतिक समीकरणों में ऐसी शक्ति बन चुका है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। अश्शहाबी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडलों का लक्ष्य आले ख़लीफ़ा शासन को बचाना है जबकि आले ख़लीफ़ा शासन ने उसी समय शासन का अधिकार खो दिया था जब मार्च में बहरैनी जनता के दमन के लिए सऊदी सेना प्रविष्ट हुयी थी। इसलिए इस शासन के पास बाक़ी रहने का अब कोई नैतिक व क़ानूनी अधिकार नहीं रह जाता। बहरैन के स्वतंत्रता आंदोलन के महासचिव ने कहा कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल बहरैनी जनता पर अपनी शर्तें थोपना चाहते हैं इसलिए जनता पर शासन के सभी अपराधों को भुलाने का दबाव डाला जा रहा है किन्तु वे स्वप्न देख रहे हैं क्योंकि बहरैनी जनता आले ख़लीफ़ा शासन के सत्ता से हटने की अपनी मुख्य मांग से पीछे नहीं हटेगी। ज्ञात रहे बहरैन के स्वतंत्रता आंदोलन के महासचिव सईद अश्शहाबी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बहरैनी शासक हमद बिना ईसा आले ख़लीफ़ा की हालिया लंदन यात्रा के दौरान ब्रितानी प्रधान मंत्री डेविड कैमरन ने केवल बहरैन में सुधार की अपील की। पर्यवेक्षकों का मानना है कि बहरैन में शासन द्वारा जनता के दमन का कैमरन की ओर से उल्लेख न किया जाना यह दर्शाता है कि लंदन अपने हितों के दृष्टिगत बहरैन में यथास्थिति का समर्थन करता है।

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