आज इस्लामी कैलेन्डर के अनुसार दस मोहर्रम है जिसे मुसलमान आशुर के नाम से याद करते हैं। इस अवसर पर पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके ७२ साथियों की शहादत का शोक विश्व भर के शीआ मुसलमानों के साथ अन्य लोग भी मनाते हैं। मोहर्रम सन 61 हिजरी क़मरी को इराक़ के कर्बला क्षेत्र में इमाम हुसैन अ ने अपने 72 साथियों के साथ अत्याचारी शासक यज़ीद की भारी सेना से युद्ध किया जिसके दौरान वे अपने बहत्तर साथियों के साथ सत्य की राह में शहीद हो गये। इस दिन की याद हर वर्ष मनायी जाती है। इस संदर्भ में ईरान , भारत और पाकिस्तान सहित विश्व के विभिन्न देशों में शोक मनाया जा रहा है और इराक़ के कर्बला नगर में लगभग चालीस लाख लोग इमाम हुसैन का शोक मनाने पहुंच चुके हैं और उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। इराक़ के कर्बला नगर में सब से अधिक श्रद्धालु भारत से पहुंचे हैं।
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