अमेरिकी सिनेट ने पहली दिसंबर को एक प्रस्ताव पारित करके ईरान के केन्द्रीय बैंक पर प्रतिबंध लगा दिया। इस प्रतिबंध को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी कांग्रेस और राष्ट्रपति की स्वीकृति की आवश्यकता है। इससे पहले अमेरिका के वित्तमंत्री ने सिनेट के नाम एक पत्र लिखकर इस प्रस्ताव के प्रति अपने विरोध की घोषणा की थी। अलबत्ता इस विरोध का यह अर्थ ईरान को सकारात्मक दृष्टि से देखना नहीं है बल्कि उसका अर्थ यह है कि मौजूद वास्तविकताओं ने अमेरिकी अधिकारियों को इस बात की अनुमति ही नहीं दी कि वे कोई ऐसा कार्य करें जिससे यह लगे कि वे ईरान के संबंध में लचीला रवाइया रखते हैं। राजनीतिक टीकाकारों यहां तक कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों का भी मानना है कि यह प्रतिबंध तेल के मूल्यों में वृद्धि का कारण बनेगा और साथ ही इससे अमेरिका एवं युरोप की आर्थिक व्यवस्था को करारा आघात पहुंचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के तेल पर प्रतिबंध से न केवल अमेरिका को बल्कि युरोपीय देशों एवं उसके व्यापारिक घटकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि प्रति बैरेल तेल में २० से ३० डालर की वृद्धि होगी जिससे अमेरिका और युरोप की अर्थ व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह ऐसी स्थिति में है कि जारी वर्ष में तेल के मूल्यों में ९ प्रतिशत की वृद्धि हो गयी और न्यूयार्क में तेल का मूल्य प्रति बैरेल १०० डालर से अधिक हो गया। राजनीतिक टीकाकारों एवं आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ईरान एशिया और युरोप में तेल की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और ईरान पर हर प्रकार के प्रतिबंध व दबाव का एशिया और युरोप पर अवश्य प्रभाव पड़ेगा। इसी कारण पहली दिसंबर को युरोपीय देशों के विदेशमंत्री ईरान के तेल पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके और ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बजाये उन्होंने गुटों, व्यक्तियों और ईरानी कम्पनियों पर प्रतिबंध लगाया। युरोपीय देशों के विदेशमंत्रियों ने बल देकर कहा है कि अगले वर्ष के जनवरी महीने से पहले वे इस संबंध में कोई निर्णय ले सकते। युरोपीय संघ साढ़े चार लाख बैरेल कच्चा तेल प्रतिदिन ईरान से आयात करता है जो निर्यात होने वाले ईरानी तेल का लगभग १८ प्रतिशत भाग है। संक्षेप में यह कि इस संबंध में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और इस देश के अधिकारियों की ईरान के विरुद्ध प्रतिबंध से चिंता का मूल का कारण अमेरिका की बदहाल अर्थ व्यवस्था है और उन्हें इस बात का भय है कि इस प्रकार के प्रतिबंधों से ईरान से कहीं अधिक अमेरिका को हानि पहुंचेगी।(एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ)
......
166