1 दिसंबर 2011 - 20:30

तेहरान जुमे की नमाज़ के इमाम ने नमाज़ के ख़ुतबे में सुरक्षा परिषद व योरोपीय देशों से अपील की कि वह ब्रिटेन की सड़ी रस्सी के सहारे अविश्वस्नीयता के कुएं में न गिरें....

तेहरान जुमे की नमाज़ के इमाम ने नमाज़ के ख़ुतबे में सुरक्षा परिषद व योरोपीय देशों से अपील की कि वह ब्रिटेन की सड़ी रस्सी के सहारे अविश्वस्नीयता के कुएं में न गिरें। आज तेहरान की केन्द्रीय जुमे की नमाज़ आयतुल्लाह अहमद ख़ातेमी की इमामत में अदा की गयी। उन्होंने नमाज़ के ख़ुतबे में ईरान के विरुद्ध ब्रितानी सरकार के हालिया दृष्टिकोण की ओर संकेत करते हुए कहा कि ब्रितानी सरकार इस्लामी जगत व ईरानी राष्ट्र के निकट अपमानित हो चुकी है और वह इस हानि को दूसरे योरोपीय देशों व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के बीच बांटना चाहती है। जुमा के इमाम ने इस बात पर बल देते हुए कि ब्रितानी पूरे विश्व में अपमानित हो चुके हैं कहा कि ब्रितानी सरकार को बारंबार ईरानी राष्ट्र सें मुंह की खानी पड़ी है और इसका एक उदाहरण ईरानी संसद में ब्रिटेन के साथ संबंध कम करने से संबंधित पारित होने वाला हालिया प्रस्ताव है। आयतुल्लाह ख़ातेमी ने कहा कि क़ाजारी शासन काल में ब्रिटेन रोयटर और तंबाकू समझौतों द्वारा ईरान को अपना उपनिवेश व दास बनाना चाहता था किन्तु मोहम्मद अली कनी व मिरज़ाए शीराज़ी जैसे महान धर्मगुरुओं की होशियारी से ब्रितानी विफल रहे। इमामे जुमा ने 7 दिसंबर को मनाए जाने वाले छात्र दिवस की ओर संकेत करते हुए इस दिन को अमरीका व ब्रिटेन के विरुद्ध छात्रों की साम्राज्य से घृणा का प्रतीक बताया और बल दिया कि 7 दिसंबर 1953 को कुछ छात्रों की शहादत ईरान के प्रतिबद्ध छात्रों के लिए मानद उपाधि है। आयतुल्लाह ख़ातेमी ने शहीदों के सरदार इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके निष्ठावान 72 साथियों की शहादत की याद में मनाए जाने वाले शोक दिवसों की ओर संकेत करते हुए कहा कि कोई भी दुख समय बीतने के साथ पुराना हो जाता है किन्तु इमाम हुसैन पर पड़ने वाला दुख ऐसी घटना है जो कभी पुरानी नहीं होगी।

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