8 नवंबर 2011 - 20:30

बहरैन में दशकों से सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाए आले शासन ख़लीफ़ा शासन के अंत की मांग को लेकर एक फिर जनता सड़कों पर निकली।

बहरैन में दशकों से सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाए आले शासन ख़लीफ़ा शासन के अंत की मांग को लेकर एक फिर जनता सड़कों पर निकली। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार कल दोपहर की नमाज़ के पश्चात राजधानी मनामा के आस पास कई नगरों में बहरैनी जनता ने रैलियां निकालीं और क्रान्ति के समर्थन में नारे लगाए। अभी तक किसी टकराव या गिरफ़तारी की रिपोर्ट नहीं है। बहरैन में सउदी समर्थित आले ख़लीफ़ा शासन द्वारा फ़रवरी से विरोध प्रदर्शनों के जारी घातक दमन से अब तक बहरैनी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारी जनता के बीच लगभग प्रतिदिन झड़प होती है। बहरैनी कार्यकर्ताओं के अनुसार इस देश में जारी क्रान्ति के आरंभ से अब तक कम से कम 45 प्रदर्शनकारी हताहत और बड़ी संख्या में जनता घायल हुई है। सैकड़ों की संख्या में लोगों को गिरफ़तार किया गया और हज़ारों लोगों को शासन विरोधी प्रदर्शनों का साथ देने के कारण नौकरियों से निकाल दिया गया है। बहरैन में जेल से रिहा होने वाले अधिकांश लोगों ने मनामा शासन द्वारा गंभीर यातनाएं दिए जाने की बात कही है। अनेक बंदियों की जेल में गंभीर यातनाओं के कारण मृत्यु हो गयी जिस पर मानवाधिकार गुटों ने गहरी चिंता जतायी है। बहरैन में राजनैतिक सुधार और संवैधानिक राजशाही की मांग को लेकर फ़रवरी के मध्य से हज़ारों की संख्या में जनता शासन विरोधी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है किन्तु आले ख़लीफ़ा शासन द्वारा लोकप्रिय क्रान्ति के बर्बरतापूर्ण दमन किए जाने के कारण अब बहरैनी जनता इस परिवार के सत्ता से तुरंत हटने की मांग कर रही है।

समाचार समाप्त

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