लेबनान और क्षेत्र के परिवर्तनों के संबंध में इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने अमेरिका और इस्राईल को चेतावनी दी है। उन्होंने अपने भाषण में क्षेत्र के समक्ष अमेरिका और इस्राईल की धमकियों को बयान करते हुए कहा कि क्षेत्र के लिए सबसे पहली चुनौती व ख़तरा ग़ैर क़ानूनी ज़ायोनी शासन का अस्तित्व है। उन्होंने अमेरिकी षडयंत्रों को दूसरा ख़तरा बताया और कहा कि अमेरिका दोबारा नये मध्यपूर्व का मानचित्र तैयार करने की चेष्टा में है। यहां पर इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि इससे पहले भी अमेरिका नये मध्यपूर्व की योजना बना चुका है जो विफल हो गयी। सैयद हसन नसरुल्लाह ने बल देकर कहा कि नये मध्यपूर्व की अमेरिकी योजना गम्भीर ख़तरा है क्योंकि इस योजना के व्यवहारिक होने के लिए क्षेत्र का विभाजन आवश्यक है ताकि ज़ायोनी शासन के अवैध अस्तित्व की सुरक्षा की जा सके। जैसाकि सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि अमेरिका और इस्राईल सदैव फूट डालने की चेष्टा में रहते हैं और वे अरब जगत के मित्र नहीं हैं। यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि अमेरिका, इस्राईल और साम्राज्यवादी शक्तियों का अपना हित साधने का सबसे बड़ा हथियार फूट डालना है। इन शक्तियों का जहां भी हित होता है वे सबसे पहले वहां फूट डालने और पश्चिम की ओर झुकाव रखने वाले व्यक्तियों को कुछ सुविधायें देकर उन्हें अपना बनाने का प्रयास करती हैं ताकि उन्हीं के माध्यम से अपना हित साध सकें। यदि क्षेत्र के लोगों को इस बात का ज्ञान हो जाये कि यदि वे एकजुट हो जायें तो क्षेत्र की कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका समाधान वे न कर सकें। यदि क्षेत्र के देश व राष्ट्र एकजुट हो जायें तो उनकी शक्ति व क्षमता में जहां असाधारण वृद्धि हो जायेगी वहीं वे बड़ी बड़ी चुनौतियों का मुक़ाबला कर सकते हैं और अमेरिका जैसे देशों के षडयंत्रों पर पानी फिर जायेगा। यदि क्षेत्रीय राष्ट्र व देश एकजुट हो जायें तो उनके विकास की गति में भी असाधारण वृद्धि हो जायेगी। संक्षेप में यह कि एकता व एकजुटता वह शक्ति है जो हर प्रकार के षडयंत्रों को विफल बना सकती है और यह वह वास्तविकता है जिस पर इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने भी बल दिया है। (एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ)
........
166