इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा है कि हर विध्वंसकारी कार्यवाही पर इस्लामी गणतंत्र ईरान का उत्तर बहुत ठोस और प्रतिद्वंद्वी को पछताने पर विवश कर देने वाला होगा। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने रविवार को पश्चिमी प्रांत किरमानशाह में विश्वविद्यालयों के छात्रों, शिक्षकों और अधिकारियों की महान सभा को संबोधित करते हुए ईरान पर आतंकवादी कार्यवाही का आरोप लगाने संबंधी अमरीका के हालिया हंगामे के निहित लक्ष्यों की ओर संकेत किया और ईरानी राष्ट्र के शत्रुओं को चेतावनी देते हुए कहा कि हर प्रकार के षडयंत्र और विध्वंसकारी कार्यवाही का ठोस एवं पछताने पर विवश कर देने वाला उत्तर दिया जाएगा। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान पिछले 32 वर्षों में कभी भी दबाव और षडयंत्रों के आगे झुका नहीं है, ईरानी जनता मैदान में उपस्थित है और सब इस्लामी व्यवस्था के सिपाही हैं जो हर शैतानी कार्यवाही के मुक़ाबले में एकता और दृढ़ता के साथ डट जाएंगे तथा किसी प्रकार का ग़ुंडा टैक्स नहीं देंगे।इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता के अनुसार ईरान के विरुद्ध अमरीका के इस नए हंगामें का एक लक्ष्य वाल स्ट्रीट विरोधी आंदोलन पर पर्दा डालना हो सकता है। उन्होंने कहा कि कम से कम 80 देशों के लोगों ने निरंतर फैल रहे इस आंदोलन का समर्थन किया है जो अमरीकी अधिकारियों के लिए बहुत कठिन और कटु अनुभव है।इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने अमरीका और यूरोप के अधिकारियों पर ज़ायोनियों के वर्चस्व का उल्लेख किया और पश्चिमी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस दिन आपकी जनता को अपनी कठिनाइयों और दुखों के वास्तविक कारण अर्थात ज़ायोनियों के समक्ष आपके अपमानजनक समर्पण का ज्ञान होगा निश्चित रूप से उसके क्रोध की ज्वाला पूंजीवादी व्यवस्था को जलाकर राख कर देगी।इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह समय प्रतिरोध, संघर्ष और तत्वदर्शिता का समय है और क्षेत्र में नई शासन व्यवस्थाओं के गठन के संवेदनशील अवसर पर ईरान की इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल स्थिति एसी प्रभावी कारक है जो वर्तमान एवं भविष्य काल में क्षेत्र में गहरी भूमिका निभा सकती है।इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस समय ईरान की शासन व्यवस्था में सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी राष्ट्रपति है जो जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है जो बहुत अच्छी और प्रभावी शैली है किंतु भविष्य में कभी जिसमें संभवतः अधिक समय लगेगा, यदि यह आभास हुआ कि कार्यपालिका के अधिकारियों के चयन के लिए संसदीय व्यवस्था अधिक उचित है तो वर्तमान प्रणाली को बदलने में कोई समस्या नहीं है।
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