इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा है कि ईरान की व्यवस्था इस्लामी गणतंत्र अर्थात इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था है जिसके आधार पर अनिवार्य है कि सभी क्षेत्रों में जनता की वास्तविक भूमिका हो और जनक्षमताओं को भरपूर प्रयोग किया जाए।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने गुरूवार को पश्चिमी प्रांत किरमानशाह के शहीदों के परिजनों, पवित्र प्रतिरक्षा के जवानों तथा घायल होकर शारीरिक रूप से विक्लांग हो जाने वालों से भेंट में कहा कि जब विदित में सब कुछ असंभव और निराशाजनक प्रतीत हो रहा था उस समय इमाम ख़ुमैनी आशावाद, प्रगति और विजय की बात कर रहे थे और अंततः सबने बड़े आश्चर्य के साथ उन्हीं बातों को व्यवहारिक बनते देखा। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने क्षेत्र के परिवर्तनों और मामलों की जटिलता की ओर संकेत करते हुए समय पर कर्तव्य परायणता तथा बुद्धिमत्ता को अति आवश्यक बताया और कहा कि ईश्वर की कृपा से ईरान की मोमिन, धार्मिक एवं प्रतिबद्ध जनता की चेतना और उमंगों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता बहुत अधिक है।इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि त्याग व बलिदान की भावना हर देश और राष्ट्र को मुक्ति दिलाने वाली भावना होती है और इस भावना के बिना प्रतिष्ठा और गौरव प्राप्त नहीं होगा।
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