सउदी अरब का समर्थन प्राप्त बहरैनी शासन ने इस बात को स्वीकार किया कि सुरक्षा बलों ने अब भी 20 महिलाओं को क़ैद कर रखा है जिन्होंने मनामा में आले ख़लीफ़ा की तानाशाही व्यवस्था के विरुद्ध प्रदर्शन किये थे। बहरैनी शासन की क़ैद में मौजूद ये महिलाएं उन 45 महिला बंदियों में शामिल हैं जिन्हें शनिवार को एक व्यापारिक प्रतिष्ठान में सत्ताधारी शासन के विरुद्ध नारे लगाने के कारण गिरफ़तार किया गया था। बहरैन में यह विरोध प्रदर्शन इस देश में अभी हाल में संपन्न हुए विवादास्पद उपचुनाव को लेकर हुए जिसका बहरैनी सरकार की वेबसाइट के अनुसार 80 प्रतिशत मतदाताओं ने बहिष्कार किया था। इन गिरफ़तार महिलाओं में सात नाबालिग़ भी हैं। बहरैन में लोकतंत्र की मांग कर रही महिलाओं, बच्चों और लोगों पर अत्याचार सऊदी अरब और कुछ अरब देशों के सुरक्षा बलों की सहायता से जारी है और विश्व समुदाय मूकदर्शक बना हुआ है। लगभग एक वर्ष पूर्व ट्यूनीशिया से उठने वाली क्रांती ने कई तानाशाहों का तख़्ता उलट दिया और हालिया कुछ महीनों से यह क्रांतियां बहरैन और यमन सहित क्षेत्र के कुछ अन्य अरब देशों में जारी हैं। बहरैन में जनता की वैध मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और जनता भेदभाव, अपमान और कठोर दमन का शिकार है। जनता ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का आयोजन करके अपनी मांग दोहराई किन्तु बहरैनी सुरक्षा बलों ने जनता की वैध मांगों का उत्तर गोलियों, आंसू गैस के गोलों और ज़हरीलि गैस कि गोलों से दिया । बहरैनी अधिकारियों ने वास्तविकता को स्वीकार करने के बजाए सऊदी सैनिकों की सहायता से जनता के दमन का मार्ग चुना कि इस ग़लत मार्ग ने मामले को और भी जटिल कर दिया। अनुभव दर्शाता है कि जिन देशों में जनता अपनी मांगों पर अड़ गयी उन देशों में शासन को सत्ता से हटना पड़ा है मिस्र, ट्यूनीशिया व लीबिया इसके ताज़ा उदाहरण हैं। यदि बहरैनी जनता अपनी मांगों पर अड़ गयी तो वह दिन दूर नहीं जब बहरैनी शासन को भी सत्ता से हटना पड़ेगा। जब जनता एक हो जाए तो उसके सामने बड़े बड़े शासन को घुटने टेकने पड़ते हैं। समाचार समाप्त.........166
28 सितंबर 2011 - 20:30
समाचार कोड: 268488
सउदी अरब का समर्थन प्राप्त बहरैनी शासन ने इस बात को स्वीकार किया कि सुरक्षा बलों ने अब भी 20 महिलाओं को क़ैद कर रखा है ....