इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयुल्लाहिल उज़मा सय्यद अली ख़ामेनई ने कहा है कि क्षेत्र में इस्लामी जागरुकता का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय व इस्लामी मूल्यों को जीवित व पश्चिम के आधिपत्य के विरुद्ध प्रतिरोध को सुदृढ़ करना है। वरिष्ठ नेता ने तेहरान में आयोजित पहले इस्लामी जागरूक्ता सम्मेलन को आज संबोधित करते हुए कहा कि मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीक़ा में क्रान्तियों का मुख्य सिद्धांत राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को फिर से जीवित करना है जिसे पश्चिम व अमरीका के प्रभुत्व और भ्रष्ट शासकों के तानाशाही शासन में कुचल दिया गया था। उन्होंने मुसलमान देशों को पश्चिम के क्रान्तियों को निष्क्रिय करने के षड्यंत्र की ओर से सचेत किया। वरिष्ठ नेता ने बल दिया कि मुसलमान राष्ट्रों को अपने देश में विदेशी हस्तक्षेप के सामने डट जाना चाहिए और शत्रु के झूठे वादों व सहयोग के दावों के झांसे में नहीं आना चाहिए। आयतुल्लाहिल उज़मा सय्यद अली ख़ामेनई ने मुसलमानों का आह्वान किया कि वे अमरीका और पश्चिम पर भरोसा करने से दूर रहें और कहा कि शत्रु आतंकवाद, गृह युद्ध, प्रतिबंध, व दुष्प्रचारों द्वारा क्रान्तियों को विफल करने का कुप्रयास कर रहे हैं। वरिष्ठ नेता ने इसी प्रकार मुसलमान देशों से जातीय व धार्मिक फूट से बचने का आह्वान करते हुए बल दिया कि इस्लामी धड़ों के बीच आपसी समझबूझ ही सफलता की कुंजी है। समाचार समाप्त..........166
16 सितंबर 2011 - 19:30
समाचार कोड: 266162
क्षेत्र में इस्लामी जागरुकता का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय व इस्लामी मूल्यों को जीवित व पश्चिम के आधिपत्य के विरुद्ध प्रतिरोध को सुदृढ़ करना है