5 अगस्त 2011 - 19:30

बहरैन में आले ख़लिफा की तानाशाही सरकार शांतिपूर्ण ढंग से प्रजातंत्र की मांग करने वाली जनता का दमन जारी रखे हुए है और उसका दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि۔۔

बहरैन में आले ख़लिफा की तानाशाही सरकार शांतिपूर्ण ढंग से प्रजातंत्र की मांग करने वाली जनता का दमन जारी रखे हुए है और उसका दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि अब उसने डाक्टर्स विदाउट बार्डर के कार्यालय पर भी आक्रमण कर दिया है। बहरैन के एक राजनेता राशिद अर्राशिद ने इस देश की तानाशाही सरकार के इस क़दम पर खेद जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि डाक्टर्स विदाउट बार्डर के बहुत से चिकित्सक अब भी इस देश की तानाशाही सरकार की जेलों में बंद हैं और उन्हें कड़ी यातनाएं दी जा रही हैं। यह ऐसी स्थिति में है जब हालिया प्रदर्शनों में घायल होने वाले, गिरफ़तारी के भय से अस्पताल नहीं जा रहे हैं और वे अपना उपचार घर में कर रहे हैं क्योंकि बहरैन के अधिकांश अस्पताल और चिकित्सा केन्द्र सुरक्षा बलों के परिवेष्टन में हैं और जैसे ही कोई घायल व्यक्ति इन केन्द्रों में जाता है उसे तुरंत गिरफ़्तार कर लिया जाता है। बहरैन की तानाशाही सरकार की यह कार्यवाही उस स्थिति में हो रही है जब विश्व समुदाय ने बहरैन के लोगों की समस्याओं व दुःखों को कम व दूर करने के लिए कुछ भी नहीं किया है। बहरैन के बहुत से गुटों ने तथाकथित मानवाधिकार संगठनों की लापरवाही की आलोचना की है और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की चुप्पी को बहरैन की तानाशाही सरकार की दमनकारी नीतियों के जारी रहने का कारण बताया है। इसी मध्य एक स्वतंत्र पश्चिमी पत्रकार Finian Cunningham ने बहरैनी सरकार के अपराधों को अमेरिका और ब्रिटेन के समर्थन का परिणाम बताया है। Finian Cunningham ने अपने आलेख में लिखा है कि अमेरिका और ब्रिटेन केवल मानवाधिकार तथा नागरिक अधिकारों का दम भरते हैं क्योंकि बहरैन में होने वाली वास्तविकताओं से उन्होंने अपनी आंखें मूंद ली हैं। Finian Cunningham ने, जो निकट से बहरैन में होने वाली घटनाओं व परिवर्तनों को देख रहे हैं, अपने आलेख में लिखा है कि अमेरिका और ब्रिटेन बहरैनी जनता की हत्या में भागीदार हैं। बहरैन की तानाशाही सरकार ने, जिसे पश्चिमी देशों का समर्थन एवं आशीर्वाद प्राप्त है, दमनकारी नीतियां लागू करके जनता की न्यायप्रेमी आवाज़ को दबाने की चेष्टा की है परंतु इस नीति का अब तक उल्टा परिणाम निकला है। बहरैन के लोगों ने बल देकर कहा है कि वे तानाशाही सरकार के विरुद्ध शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे और बहरैन के राजनैतिक गुटों व दलों ने भी तानाशाही सरकार की दमनकारी नीति की निंदा करते हुए कहा कि यह नीति विफल हो कर रहेगी। अलवेफाक़ आंदोलन के एक नेता ख़लील अलमरज़ूक़ ने बहरैनी सरकार को संबोधित करते हुए कहा है कि हिंसा और दमन पर आधारित नीति का कोई परिणाम नहीं निकलेगा क्योंकि लोग हमेशा रहेंगे और ये सरकारें हैं जिनके स्थान पर दूसरी सरकारें आती हैं। वर्तमान समय में बहरैन की आले ख़लिफ़ा की तानाशाही सरकार ने देश के भीतर अपनी वैधता खो दी है और यह वास्तव में उस तानाशाही सरकार की मृत्यु के समान है जिसने अत्याचार, दमन और हिंसा पर आधारित कार्यवाहियों के माध्यम से वर्षों तक अपनी जनता पर शासन किया है। समाचार समाप्त......166