निःसंदेह वर्तमान युग में जिसे कुछ लोगों ने नग्नता और यौन सम्बंधी स्वतंत्रता का युग बताया है, और पश्चिमी सभ्यता पुजारी लोगों ने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता का एक भाग बताया है, इसलिए ऐसे लोग पर्दा की बातों को सुनकर मुंह बनाते हैं और पर्दे को पिछले ज़माने का अफसाना शुमार करते हैं. लेकिन इस स्वतंत्रता और पथभ्रष्टा से जितना अधिक दंगे और बुराईयों में वृद्धि हो रही हैं उतना ही पर्दे की बातों पर ध्यान दिया जा रहा है.
यद्धपि इस्लामी और धार्मिक समाज में बहुत सी समस्याओं का समाधान हो चुका हैं और बहुत से प्रश्न का संतोषजनक उत्तर दिया गया है, लेकिन चूंकि यह समस्या बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए इस मसले पर ज्यादा बहस और चर्चा की आवश्यकता है.
समस्या यह है कि (अत्याधिक क्षमा के साथ) क्या औरतों से (यौन सम्बंध के अतिरिक्त) सुनने, देखने और स्पर्श करने की दूसरी लज़्जतें सभी पुरुषों के लिए हैं या सिर्फ उनके पतियों से विशिष्ट हैं?
बहस यह है कि महिलाएं अपने शरीर के विभिन्न अंगों के प्रफलसफा के एक असीमित मुकाबले में जवानों की काम वासना को भड़काएँ और दूषित पुरुषों की वासना का शिकार बनें या यह समस्याएं पतियों से संबंधित और विशिष्ट हैं?!
इस्लाम इस दूसरी दृष्टकोण का समर्थक है और हिजाब को इसी लिए अनिवार्य किया है, हालांकि पश्चिमी देश और पश्चिमी समर्थक पहले विचार के स्वीकार कर्ता हैं.
इस्लाम कहता है कि सेक्स और देखने, सुनने और छूने की क्रिया पति से विशेष है और दूसरे के लिए पाप और समाज के लिए नापाकी का कारण है.