एक सर्वेक्षण के अनुसार, लेबनान के अधिकतर शिया नागरिकों के लिए ज़ायोनी कब्जे का अंत और सशस्त्र प्रतिरोध, आर्थिक और रोजमर्रा की परेशानियों से भी अधिक महत्वपूर्ण है।
लेबनान सरकार के प्रतिरोधी संगठनों को हथियार छोड़ने के फैसले के बाद देश में कई सर्वेक्षण किए गए हैं। इन सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लेबनान के लोगों के बीच अब भी प्रतिरोध को समर्थन हासिल है।
कुछ समय पहले लेबनान के सलाहकार अध्ययन एवं दस्तावेज केंद्र के सर्वेक्षण में सुन्नी, ईसाई और दरूज़ समेत विभिन्न समुदायों के लोगों की राय ली गई थी। इसमें सामने आया था कि लगभग 60 प्रतिशत लेबनानी नागरिक, जिनमें आधे सुन्नी, करीब एक-तिहाई ईसाई और अधिकतर दरूज़ शामिल थे, किसी वैकल्पिक रक्षा रणनीति के बिना प्रतिरोध के हथियार छीनने और उसे निहत्था करने के खिलाफ हैं।
अब इसी केंद्र ने केवल शिया समुदाय के लोगों के बीच एक नया सर्वेक्षण किया है।
समाचार पत्र 'अल-अखबार' की रिपोर्ट के अनुसार, 1,065 लेबनानी शिया नागरिकों पर किए गए इस सर्वेक्षण से पता चला है कि खराब आर्थिक और जीवन-यापन की परिस्थितियों के बावजूद वे सशस्त्र प्रतिरोध के विकल्प का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, लेबनान के राष्ट्रपति और सरकार के प्रति उनका भरोसा कम हुआ है।
- करीब 80 प्रतिशत शिया नागरिकों का मानना है कि पिछले साल की तुलना में उनकी आर्थिक और जीवन-यापन की स्थिति और खराब होगी।
- 62.3 प्रतिशत लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा लेबनान की जमीन से ज़ायोनी कब्जे को समाप्त करना है।
- 48.4 प्रतिशत लोगों का मानना है कि लेबनान की जमीन को आजाद कराने और देश की सुरक्षा तथा संप्रभुता सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी रास्ता सशस्त्र प्रतिरोध है।
- 53.5 प्रतिशत शिया नागरिकों का मानना है कि युद्ध और शांति का फैसला लेने का अधिकार केवल प्रतिरोध के पास होना चाहिए।
- जबकि 37.6 प्रतिशत लोगों का कहना है कि युद्ध और शांति से जुड़ा फैसला सरकार और प्रतिरोध के बीच आपसी सहमति से होना चाहिए।
लेबनान के अध्ययन एवं दस्तावेज केंद्र द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण का उद्देश्य देश के शिया समुदाय की राजनीतिक सोच और ज़ायोनी कब्जे से मुक्ति के मुद्दे पर उनकी राय जानना था।
सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबिक, आर्थिक और जीवन-यापन की खराब स्थिति भी शिया समुदाय के बीच प्रतिरोध के समर्थन को निर्णायक रूप से प्रभावित नहीं कर सकी है।
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