संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि कब्जे वाले पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में फिलिस्तीनियों पर इस्राईली बस्तियों के निवासियों के हमलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिछले 26 दिनों में ऐसे 397 हमले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2006 के बाद यह सबसे बड़ा आंकड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि फिलिस्तीनी किसानों और उनकी कृषि भूमि को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। खासकर जैतून की फसल की कटाई के मौसम में इन हमलों में तेजी आई है।
OCHA के अनुसार, केवल एक सप्ताह के दौरान जैतून की फसल से जुड़े 38 हमले दर्ज किए गए। इन घटनाओं में कई फिलिस्तीनी घायल हुए और उनकी संपत्ति तथा खेती के उपकरणों को नुकसान पहुंचा।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों का असर केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे फिलिस्तीनी परिवारों की रोजी-रोटी और अपनी कृषि भूमि तक पहुंच भी प्रभावित हो रही है।
हमलों के दौरान जैतून की फसल चोरी करने, पेड़ों को नष्ट करने, किसानों पर हमला करने और उन्हें फसल की कटाई पूरी नहीं करने देने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
OCHA की रिपोर्ट में हेब्रोन नगर पालिका के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि लगातार पाबंदियों और हमलों के कारण लगभग 3 हजार फिलिस्तीनियों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि सुरक्षा संबंधी खतरों और स्कूलों तक पहुंचने में कठिनाइयों के कारण 2 लाख 51 हजार से अधिक फिलिस्तीनी छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
पश्चिमी तट के विभिन्न इलाकों में इस्राईली बस्तियों के निवासियों के समूह फिलिस्तीनियों की कृषि भूमि, घरों, गाड़ियों और उनके रहने वाले इलाकों पर हमले कर रहे हैं।
इन हमलों में 'हिलटॉप यूथ' के नाम से पहचाने जाने वाले समूह भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी घटनाएं विशेष रूप से पश्चिमी तट के 'क्षेत्र सी' (Area C) में सामने आई हैं, जहां फिलिस्तीनियों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जैतून की खेती हजारों फिलिस्तीनी परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में किसानों को उनकी जमीनों तक पहुंचने से रोकना, फसल चोरी करना और जैतून के पेड़ों को नष्ट करना उनकी आर्थिक स्थिति को और खराब कर रहा है। इससे स्थानीय फिलिस्तीनी समुदायों पर दबाव भी बढ़ रहा है।
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