तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा खामेनेई ने कहा है कि राष्ट्रीय प्रतिरोध के कारण दुश्मन हताश हो रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने, हुर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन और युद्ध समाप्त करने के लिए ईरानी जनता के अधिकारों और हितों की रक्षा पर जोर दिया।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रज़ाई ने सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा हुसैनी खामेनेई से मुलाकात की।
इस मुलाकात में सर्वोच्च नेता ने सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और उसके सचिवालय को देश के मामलों की योजना बनाने और फैसले लेने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृति, राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन सभी क्षेत्रों में फैसले लेते समय उनके आपसी प्रभावों को ध्यान में रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मजबूत और सही फैसले लेने के लिए हर कदम की शुरुआत से लेकर उसके अंतिम नतीजे तक की पूरी योजना और स्पष्ट तस्वीर होना आवश्यक है।
सुप्रीम लीडर ने राष्ट्रीय एकता और आपसी विश्वास को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनता और अधिकारियों के बीच भरोसा बढ़ाना जरूरी है। साथ ही, संविधान के अनुच्छेद 176 की क्षमता का इस्तेमाल करके राष्ट्रपति और सरकारी संस्थाओं को देश की समस्याओं का समाधान तेजी से करने में मदद दी जानी चाहिए।
इस बैठक में हुर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन के जरिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा करने तथा पड़ोसी देशों के साथ स्थायी और पारस्परिक हितों के आधार पर द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
सर्वोच्च नेता ने कहा कि दुश्मन का हताश होना राष्ट्रीय प्रतिरोध की उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने देश और व्यवस्था की रक्षा में जनता की भागीदारी बनाए रखने के लिए समय पर और सक्रिय रूप से जानकारी देने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त करने और ‘न युद्ध, न शांति’ जैसी स्थिति को खत्म करने के लिए ईरानी जनता और प्रतिरोध मोर्चे के अधिकारों तथा हितों को सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके लिए अधिकारियों की ओर से रखी गई शर्तों को पूरा कराने के प्रयास जारी रहने चाहिए।
बैठक के दौरान मोहसिन रज़ाई ने देश की विभिन्न परिस्थितियों और चल रहे प्रयासों के बारे में रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिवालय क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था और व्यवस्था-तंत्र विकसित करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जो क्षेत्रीय देशों की अपनी पहल पर आधारित हो।
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