तेहरान। क्षेत्रीय मामलों के विश्लेषक अब्दुल बारी अतवान ने दावा किया है कि भविष्य में होने वाला युद्ध अमेरिका के वैश्विक वर्चस्व को कमजोर कर सकता है और इस्राईल के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। उनके अनुसार, इस्राईल इस समय आंतरिक विभाजन, आर्थिक संकट और सैन्य दबाव का सामना कर रहा है।
समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, अतवान ने कहा कि इस्राईल के अंदर सामाजिक और राजनीतिक मतभेद बढ़ रहे हैं। धार्मिक कट्टरपंथियों और धर्मनिरपेक्ष वर्गों के बीच तनाव भी बढ़ रहा है। इसके अलावा, ईरान, लेबनान और गज़्जा में युद्ध के कारण इस्राईल का सैन्य खर्च काफी बढ़ गया है।
अतवान ने कहा कि इस्राईल पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, अमेरिका में भी इस्राईल को समर्थन देने को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं। कई अमेरिकी नागरिक चाहते हैं कि इस्राईल को दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर खर्च होने वाला पैसा देश की आंतरिक समस्याओं, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने में लगाया जाए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान हुआ है, जिससे उसकी वैश्विक ताकत की छवि प्रभावित हुई है। अतवान के अनुसार, यदि अमेरिका इस्राईल को सैन्य और आर्थिक सहायता देना कम कर देता है, तो इस्राईल के लिए अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
अतवान ने इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की उस कथित धमकी का भी जिक्र किया, जिसमें फलस्तीनी प्राधिकरण को भंग करने, उसके सुरक्षा बलों को निहत्था करने और ओस्लो समझौते को रद्द करने की बात कही गई है। उन्होंने इसे नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए नुकसानदेह कदम बताया।
अतवान ने अंत में कहा कि प्रतिरोधी मोर्चे की सैन्य और राजनीतिक दृढ़ता पश्चिम एशिया की स्थिति बदल सकती है। उनके विचार में, भविष्य का युद्ध दुनिया में शक्ति संतुलन को बदलकर अमेरिका के दशकों पुराने वर्चस्व को चुनौती दे सकता है।
आपकी टिप्पणी