18 अक्टूबर 2026 - 18:24
सऊदी अरब को अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं अमेरिका और इस्राईल: मोहम्मद अल-फरह

यमन के लोगों को झुकाने और उन्हें अमेरिका तथा इस्राईल के हितों के मुताबिक फैसले लेने के लिए मजबूर करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।

सनआ: यमन के लोकप्रिय जनांदोलन अंसारुल्लाह के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य मोहम्मद अल-फरह ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इस्राईल सऊदी अरब को अपने राजनीतिक और चुनावी हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यमन सऊदी अरब के दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा और अपनी जमीन व संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।

अल-मसीरा वेबसाइट के मुताबिक, मोहम्मद अल-फरह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट में कहा कि यमन के लोगों को झुकाने और उन्हें अमेरिका तथा इस्राईल के हितों के मुताबिक फैसले लेने के लिए मजबूर करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।

अल-फरह ने कहा कि सऊदी अरब चाहता है कि यमन के लोग अपनी जमीन छोड़ दें, रियाज़ के अधीन रहना स्वीकार करें और उसकी नीतियों का समर्थन करें। उन्होंने सऊदी अरब पर ग़ज़्ज़ा युद्ध के दौरान इस्राईल का समर्थन करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि यमन पर लगाए जा रहे आरोपों, खासकर उसे विद्रोही और ईरान का समर्थक बताने के जरिए, राष्ट्रीय संप्रभुता और विदेशी हस्तक्षेप के विरोध जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

अंसारुल्लाह नेता ने कहा कि इस तरह के दबाव से यमन अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। यमन के लोग अपने देश के किसी भी हिस्से पर कब्जा स्वीकार नहीं करेंगे और न ही अमेरिका या किसी अन्य विदेशी ताकत की अधीनता मंजूर करेंगे।

उन्होंने सऊदी अरब पर यमन के संघर्ष में दूसरे देशों और पक्षों को खींचने तथा अपने फैसलों के परिणामों का बोझ दूसरों पर डालने का भी आरोप लगाया।

अल-फरह ने आरोप लगाया कि इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सऊदी अरब पर दबाव डालकर उसे इस्राईल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं।

उनके मुताबिक, इन कोशिशों का उद्देश्य दोनों नेताओं को राजनीतिक और चुनावी लाभ पहुंचाना है। हालांकि, ये सभी आरोप मोहम्मद अल-फरह के बयानों पर आधारित हैं।

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