बाकू: अज़रबैजान में हिजाब पहनने वाली छात्राओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर सरकार की शिक्षा नीति की आलोचना हो रही है। वहीं, स्कूलों में प्रवेश से रोकी गई छात्राओं के समर्थन में अज़रबैजान की महिलाएं और लड़कियां हिजाब पहनकर अभियान चला रही हैं।
अहलुलबैत समाचार एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर लोग सरकार की स्कूल ड्रेस नीति पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूलों में एक जैसी यूनिफॉर्म लागू करने के नियम का इस्तेमाल धार्मिक आजादी को सीमित करने और मुस्लिम लड़कियों को शिक्षा से वंचित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
आलोचकों ने हिजाब पहनने वाली छात्राओं पर लगाई गई पाबंदियों को उनके अधिकारों और सम्मान के खिलाफ बताया है। उन्होंने सरकार से इन प्रतिबंधों को खत्म करने की मांग की है।
अज़रबैजान की महिलाओं और लड़कियों के बीच हिजाब पहनकर छात्राओं का समर्थन करने का अभियान जोर पकड़ रहा है। इस अभियान में शामिल महिलाएं और लड़कियां हिजाब पहनकर उन छात्राओं के प्रति एकजुटता दिखा रही हैं, जिन्हें इस्लामी पहनावे के कारण कक्षाओं में प्रवेश करने से रोके जाने की खबरें सामने आई हैं।
अभियान से जुड़ी महिलाएं धार्मिक पहनावे की आजादी और अपनी पसंद के कपड़े पहनने के अधिकार की मांग कर रही हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में छात्राओं को स्कूलों के बाहर विरोध करते हुए देखा गया है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, कुछ छात्र अपने हिजाब पहनने वाली सहपाठियों के समर्थन में स्कूलों के बाहर जमा हुए। वहीं, कुछ छात्रों ने प्रतिबंधों के विरोध में कक्षाओं में जाने से इनकार कर दिया।
सरकार की आलोचना करने वालों का कहना है कि एक जैसी स्कूल यूनिफॉर्म का नियम किसी छात्रा को उसकी धार्मिक मान्यताओं के कारण शिक्षा से दूर रखने का आधार नहीं बन सकता।
इस बीच, सोशल मीडिया पर इंस्टाग्राम और टिकटॉक के इस्तेमाल में परेशानी आने की खबरें भी सामने आई हैं।
कुछ यूजर्स ने आशंका जताई है कि इन प्लेटफॉर्म पर हिजाब विरोधी पाबंदियों के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े वीडियो तेजी से फैलने के कारण ऐसी रुकावटें आई होंगी। हालांकि, अज़रबैजान के अधिकारियों ने अब तक इन शिकायतों या संभावित कारणों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। इसलिए इन रुकावटों और हिजाब अभियान के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अज़रबैजान के स्कूलों में हिजाब को लेकर विवाद पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2010 से 2012 के बीच स्कूलों के पहनावे से जुड़े इसी तरह के नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, उस समय कुछ प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया था और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।
अब एक बार फिर हिजाब का मुद्दा देश की शिक्षा व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस का केंद्र बन गया है।
अज़रबैजान में विरोध प्रदर्शनों पर कानूनी और सुरक्षा संबंधी पाबंदियां होने के कारण सोशल मीडिया पर चल रहे अभियान का महत्व बढ़ गया है। हिजाब पहनने वाली छात्राओं के समर्थक इस माध्यम से अपनी एकजुटता दिखा रहे हैं और उनके शिक्षा के अधिकार तथा धार्मिक पहनावे की स्वतंत्रता का मुद्दा उठा रहे हैं।
फिलहाल, हिजाब से जुड़ी पाबंदियों, छात्राओं के विरोध और सोशल मीडिया सेवाओं में आई कथित रुकावटों को लेकर बहस जारी है।
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