वॉशिंग्टन पोस्ट ने इराक़ की ऐनुल असद छावनी पर ईरान की मीज़ाईल कार्यवाही के अमरीकी फ़ौजियों पर असर के बारे में एक रिपोर्ट छापी है। इस रिपोर्ट में इस अख़बार ने बताया है कि ट्रम्प के राष्ट्रपति काल के सबसे ख़तरनाक संकटों में से एक में अपनी जान बचाने में सफल हुए अमरीकी फ़ौजी, अभी भी ईरान की मीज़ाईल कार्यवाही के सदमे से उबर नहीं पाए हैं।
वॉशिंग्टन पोस्ट ने, ऐनुल असद छावनी पर ईरान की मीज़ाईल कार्यवाही के वक़्त इस छावनी में मौजूद कुछ अमरीकी फ़ौजियों के अनुभव का ज़िक्र किया और इसे ट्रम्प सरकार के शासन के बड़े संकटों में एक बताया जिसका असर एक साल बाद भी बाक़ी है।
अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने शासन काल के सबसे बड़े सुरक्षा संकट से निपटने के लिए अचानक टैक्टिक बदली और 8 जनवरी 2020 के ईरान के मीज़ाईल हमले के बाद ट्वीट किया थाः “सब चीज़ ठीक है।”
अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने ऐनुल असद छावनी पर ईरान की मीज़ाईल कार्यवाही में, 110 अमरीकी फ़ौजियों को सदमा पहुंचने की सूचना दी थी।
वॉशिंग्टन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरान ने इराक़ में अमरीकी छावनियों पर बैलिस्टिक मीज़ाईल से हमला किया था जो 40 फ़िट लंबे थे और उनमें से हर एक में 725 किलो से ज़्यादा विस्फोटक भरे हुए थे।
ये मीज़ाईल उन सभी हथियारों से ज़्यादा ताक़तवर थे जो अमरीका की ओर से एक पीढ़ी के दौरान फ़ायर हुए हैं। अमरीकी फ़ौजियों को ईरान की इस कार्यवाही के डरावने सपने अभी भी आते हैं।
मेजर एलेन जॉनसन ने इस घटना को याद करते हुए बतायाः मैं आज भी बेचैनी का शिकार हो जाता हूँ। आज भी मुझे इस घटना के डरावने ख़ाब आते हैं। मैं सपने में उन मीड़ाइलों के गिरने और उनकी डरावनी आवाज़ सुनात हूँ।