31 दिसंबर 2020 - 18:48
यमन के अदन एयरपोर्ट पर सिलसिलेवार धमाकों का ज़िम्मेदार कौन? सऊदी अरब समर्थित यमनी नेताओं को रियाज़ के होटलों में बैठकर काम करना होगा, यमन में उनके लिए कोई ठिकाना नहीं

यमन के अदन एयरपोर्ट पर जो धमाके हुए हैं उनसे कई युद्धरत पक्षों को फ़ायदा पहुंचने वाला है। पता चला है कि सऊदी अरब के भीतर बैठकर गठित की गई यमनी सरकार के मंत्रियों का विमान जैसे ही अदन एयरपोर्ट पर पहुंचा वहां धमाके होने लगे। फिर जब इन मंत्रियों को किसी तरह बचाकर मआशीक़ राष्ट्रपति भवन ले जाया गया तो वहां भी धमाके हो गए।

इससे पता चलता है कि सऊदी अरब जाकर वहां शपथ ग्रहण करने वाली इस सरकार के मंत्रियों को हर हाल में निशाना बनाने की योजना तैयार की गई है। यानी सीधा संदेश यह है कि इन मंत्रियों को यमन के भीतर कोई सुरक्षित ठिकाना मिलने वाला नहीं है।

हमले के ज़िम्मेदार शायद यह संदेश देना चाहते हैं कि सऊदी अरब के भीतर बैठकर जिस सरकार का गठन होगा यमन में उसके लिए कोई जगह नहीं है। यही वजह है कि जिस समय इस सरकार के मंत्री रियाज़ से अदन पहुंचने वाले विमान से उतर रहे थे ठीक उसी समय धमाके शुरू हो गए। अलबत्ता विमान को निशाना नहीं बनाया गया।

पहली नज़र में तो लगता है कि इस हमले का जिम्मेदार अंसारुल्लाह आंदोलन होगा जो पूरे यमन पर एक छत्र शासन की स्थापना चाहता है। ज़मीनी स्तर पर देखा जाए तो पूरे उत्तरी इलाक़े इसी ताक़तवर संगठन के क़ब्ज़े में हैं जबकि दूसरे नए इलाक़े भी उसके नियंत्रण में आ चुके हैं और पूर्वोत्तरी प्रांत मारिब पर कभी भी नियंत्रण हो सकता है।

दक्षिणी इलाक़ों में एक अंतरिम सरकार नाम का संगठन है जिसे इमारात का समर्थन हासिल है जबकि दूसरी ओर पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी का एक संगठन है जिसे सऊदी अरब समर्थन दे रहा है। इमारात और सऊदी अरब द्वारा समर्थित संगठनों के बीच रक्तरंजित झड़पें हो रही हैं।

यही वजह है कि अदन एयरपोर्ट हमलों के मामले में इमारात को भी ज़िम्मेदार माना जा रहा है कि शायद उसने अपने प्राक्सी संगठन की मदद से यह हमले करवाए हैं। यह भी हो सकता है कि इन से हटकर भी कोई पक्ष हो जो सऊदी अरब के भीतर दो सप्ताह पहले होने वाले समझौते से सहमत न हो इसलिए कि उसे समझौते में उचित भागीदारी न मिली हो।

इमारात द्वारा समर्थित प्राक्सी संगठन पर इसलिए अधिक संदेह है कि जैसे ही रियाज़ में बैठकर नई यमनी सरकार के गठन के बारे में समझौता हुआ इस संगठन ने अदन के पूरे इलाक़े पर अपना सैनिक नियंत्रण मज़बूत करना शुरू कर दिया था।

अंसारुल्लाह आंदोलन ने इस हमले से अपना कोई भी संबंध होने से इंकार किया है। संगठन के नेता मुहम्मद बुख़ैती ने कहा कि जो कुछ हुआ वह विदेशी एजेंटों की आपसी लड़ाई है।

इस घटना का सऊदी अरब और इमारात द्वारा समर्थित संगठनों के बीच समझौता करवाने की कोशिशों पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जबकि धीरे धीरे पूरे यमन पर अंसारुल्लाह का नियंत्रण मज़बूत होता जाएगा।

ख़ालिद जयूसी

फ़िलिस्तीनी पत्रकार