वर्ल्ड मीटर वेबसाइट के अनुसार दुनिया में अब कोरोना से संक्रमित होने वालों की संख्या 7 करोड़ 66 लाख 20 हज़ार 721 हो चुकी है। इनमें 5 करोड़ 37 लाख 47 हज़ार 168 लोग ठीक हो चुके हैं जबकि मरने वालों की संख्या 16 लाख 91 हज़ार 772 तक पहुंच गई है।
कोरोना वायरस की महामारी ने अमरीका में सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुंचाया है। अमरीकी सेना का कहना है कि देश के सभी राज्यों के लिए कोरोना वायरस की वैक्सीन रिलीज़ कर दी गई है और इसके वितरण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए सेना काम कर रही है।
वैक्सीन वितरण के लिए निर्धारित अमरीकी सैनिक आप्रेशन टीम के प्रमुख जनरल गोस्टाव बीर्ना ने बताया कि जारी वर्ष के अंत और अगले वर्ष की शुरूआत तक सेना देश में लगभग 2 करोड़ डोज़ वैक्सीन का वितरण करेगी।
वाशिंग्टन पोस्ट ने लिखा है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कोरोना वायरस की महामारी को गंभीरता से नहीं लिया जिसके नतीजे में देश में त्रास्दी जैसे हालात पैदा हो गए। अख़बार ने दर्जनों अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा कि ट्रम्प ने विज्ञान पर संदेह किया, रोकथाम के उपायों को नहीं अपनाया जिसके नतीजे में आज के हालात पैदा हुए, ट्रम्प ने व्यक्तिगत नीतियों को जनता के स्वास्थ्य पर थोप दिया।
ट्रम्प के समर्थक कहते हैं कि ट्रम्प की सराहना की जानी चाहिए कि उनकी सरकार बहुत जल्द कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करवाने में सफल हुई।
इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने कहा कि कोरोना वायरस की नई पीढ़ी ने डेनमार्क, हालैंड और आस्ट्रेलिया में हमला किया है और ब्रिटेन में इसी नई नस्ल के वायरस के कारण हालात क़ाबू से बाहर हो गए हैं।
ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि नई पीढ़ी के कोरोना वायरस पर क़ाबू नहीं हो पा रहा है, सोशल डिस्टेंसिंग के ज़रिए तत्काल हालात को कंट्रोल करने की ज़रूरत है। उनका कहना था कि इस नई नस्ल के वायरस को समझने के लिए देश को लंबी प्रक्रिया तय करनी होगी।
बोरिस जानसन सरकार ने देश में कड़ा लाकडाउन लागू किया है। जानसन ने कहा कि नई नस्ल का कोरोना वायरस जो अब सामने आया है बहुत तेज़ी से फैलता है। साथ ही उन्होंने कहा कि वैक्सीन भी अपना काम कर रही है।