15 दिसंबर 2020 - 16:09
जद्दा बंदरगाह पर हमले में सऊदी अरब और क़तर के लिए ईरान का क्या संदेश है? ईरान के घटक, कहां हमला करके पूरी दुनिया को चौंका सकते हैं?

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुलयौम में इस के मुख्य संपादक और अरब जगत के प्रसिद्ध पत्रकार अब्दुलबारी अतवान ने मध्य पूर्व के हालात और युद्ध की आशंकाओं का जायज़ा लिया है।

सऊदी अरब के जद्दा की बंदरगाह में खड़े एक आयल टैंकर में धमाका हुआ। सिंगापुर, के फ्लैग वाले इस आयल टैंकर में 60 हज़ार टन पेट्रोल था जिसकी वजह से तेलवाहक जहाज़ में आग लग गयी और जेद्दा बंदरगाह को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया।

कुछ महीनों के भीतर यह इस प्रकार का तीसरा हमला है। अलबत्ता पिछले महीने जो पहला हमला किया गया था वह सब से अधिक खतरनाक था। इस हमले में सऊदी अरब के मदीना नगर में आरामको कंपनी के तेल भंडार को " कुद्स-2" क्रूज़ मिसाइल से निशाना बनाया गया था जिसे राडार भी नहीं पकड़ पाते हैं। दूसरा हमला, सऊदी अरब के अश्शफ़ीक़ बंदरगाह पर यूनानी तेलवाहक जहाज़ पर हुआ जिससे उसमें आग लग गयी।

सऊदी अरब के सब से बड़े बंदरगाह जेद्दा में तेलवाहक जहाज़ पर हमले की ज़िम्मेदारी किसी ने स्वीकार नहीं की लेकिन आरामको के तेल भंडार पर हुए राकेट हमले की ज़िम्मेदारी तो यमन के अंसारुल्लाह संगठन ने स्वीकार की थी। यह हमला जिस राकेट से किया गया था उसे यमन के सअदा से फायर किया गया था और उसने 650 किलोमीटर की दूरी तय करके आरामको के तेल भंडार को तबाह कर दिया था। उसे अमरीका का बेहद आधुनिक एन्टी मिसाइल सिस्टम " पेट्रायाट " भी नहीं रोक पाया और न ही बेहद आधुनिक राडार उस मिसाइल को पकड़ सके।

यह तो पक्की बात है कि तेलवाहक जहाज़ों का युद्ध परशियन गल्फ से लाल सागर पहुंच चुका है और अब सऊदी अरब के तट पर हो रहा है चाहे वह उत्तरी छोर पर हो या फिर उसके बीच में जैसे जद्दा। यह चीज़ सऊदी अरब और उसके पश्चिमी घटकों के लिए चिंताजनक है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 12 प्रतिशत भाग लाल सागर और स्वेज़ चैनल से किया जाता है।

 

तनाव में यह वृद्धि इस्राईल के साथ इस्लामी देशों के संबंध बनाने के लिए सऊदी अरब के घटकों के उतावलेपन के दौरान और लाल सागर के तट पर सऊदी अरब के नये और आधूनिक नगर " न्यूम" में होने वाली उस बैठक का एक परिणाम है जिसमें इस्राईल के प्रधानमंत्री, अमरीका के विदेशमंत्री और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने भाग लिया था। इस भेंट के कुछ ही दिनों बाद, जिसका सऊदी विदेशमंत्री ने इन्कार किया, इस्राईल से अरब देशों के संबंधों की तांगे के कोचवान और अमरीकी राष्ट्रपति के दामाद जेयर्ड कुश्नर भी न्यूम में आ धमके और फिर वहां से वह क़तर गये और इस यात्रा का मक़सद, क़तर और सऊदी अरब के बीच सुलह सफाई बताया गया लेकिन पश्चिमी मीडिया का कहना है कि सऊदी अरब और क़तर की छावनियों से ईरान के खिलाफ इस्राईली व अमरीकी हमले की आशंका बहुत अधिक बढ़ गयी है।

    लाल सागर में जहाज़रानी और उसकी सभी बंदरगाहें और इसी तरह उसमें चलने वाले सभी व्यापारिक जहाज़ और युद्धपोत, यमन के असांरुल्लाह के रहम व करम पर हैं जो ईरान का बेहद मज़बूत घटक है और इस खतरे से स्वेज़ चैनल से मिलने वाली आमदनी भी खत्म हो सकती है।  

आज कल जो रिपोर्टं आ रही हैं उनमें कहा जा रहा है कि सऊदी अरब के दबाव की वजह से अमरीका, यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन का नाम आतंकवादियों की सूचि में शामिल करने पर विचार कर रहा है इस लिए यह हालिया तनाव उसी का परिणाम हो सकता है तथा जेद्दा बंदरगाह पर तेलवाहक जहाज़ पर हमला, सऊदी अरब के लिए एक चेतावनी हो सकती है।

इलाक़े में युद्ध से इस तिकड़ी को फायदा मिलेगा

 

यमन के अंसारुल्लाह और उसके घटकों के पास खोने के लिए बहुत कुछ नहीं हैं क्योंकि यमन पर गत 6 वर्षों से अमरीकी विमान बमबारी कर रहे हैं और उसके तीन करोड़ से अधिक नागरिक इस बमबारी की वजह से या फिर सऊदी अरब और उसके घटकों की ओर की गयी घेराबंदी की वजह से भूख से मरने वाले हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प, उनके दामा और उनकी सरकार के चरमपंथी या जो बचा है और उनके साथ नेतेन्याहू भी इलाक़े में युद्ध की आग भड़काने और ईरान तथा उसके घटकों को निशाना बनाने की योजना तैयार कर रहे हैं। यह इस लिए हैं क्योंकि वह लोग आर्थिक प्रतिबंध लगा कर ईरान को झुकाने में नाकाम रहे। इस प्रकार के युद्ध से वह ईरान के साथ परमाणु समझौते में जो बाइडन की वापसी की राह भी कठिन करना चाह रहे हैं।

चार दिन पहले, अमरीका के दो बी-52 बमवर्षक विमानों ने सऊदी अरब के एफ-16 विमानों की सुरक्षा के लिए उड़ान भरी जो वास्तव में ईरान के लिए धमकी है तो क्या, जद्दा में तेलवाहक जहाज़ पर हमला, अमरीका की इस भड़काऊ कार्यवाही का जवाब था? क्या इसका मकसद सऊदी अरब और क़तर को चेतावनी देना था जहां से ईरान पर हमले की तैयारी की जा रही है? क्या इस तरह से ईरान सऊदी अरब और क़तर को यह बताना चाहता है कि अगर युद्ध हुआ तो ईरान की जवाबी कार्यवाही कैसी तबाही फैला सकती है?   

ईरान की सैन्य तकनीक की प्रगति की झलक दिखाने वाले हौसियों के मिसाइल, जेद्दा, यंबा, जाज़ान और बक़ीक़ तक ही नहीं रुकेंगे और यह भी हो सकता है कि वह इस्राईल की ईलात बंदरगाह को  निशाना बना कर सब को चौंका दें। जो लोग यमन के लोगों को मिसाइलों और युद्धक विमानों से निशाना बना रहे हैं और जो लोग, हमला करने वालों को हथियार दे रहे हैं उन्हें, यमन के लोगों की ओर से ऐसी जवाबी कार्यवाही का भी तो सामना करना चाहिए जिसके बारे में वह सोच भी नहीं सकते।