1 दिसंबर 2020 - 16:37
शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या का इंतेक़ाम लेने के लिए ईरान के विकल्प क्या हैं?

ईरानी अधिकारियों की ओर से वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे की हत्या में इस्राईल के लिप्त होने की बात कहे जाने और इस अपराध का बदला लेने का संकल्प जताए जाने के बाद इस्राईल बुरी तरह से सहमा हुआ है।

कुछ टीकाकारों का कहना है कि ईरान की संसद ने परमाणु गतिविधियों के बारे में जो बिल पास किया है वह यूरेनियम संवर्धन की मात्रा बढ़ाने का नहीं है बल्कि ईरान की ओर से चुनौती बढ़ाने का बिल है क्यों कि जिन लोगों ने डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे को शहीद किया है, उनका विचार है कि ईरान हर स्थिति में परमाणु समझौत पर कटिबद्ध रहेगा जबकि वास्तविकता यह है कि पश्चिमी देश, ईरान के इस दृष्टिकोण को अच्छी तरह समझते नहीं हैं कि सम्मान व प्रतिष्ठ आर्थिक लाभों से कहीं ऊपर है। टीकाकारों का कहना है कि ईरान की प्रतिक्रिया सिर्फ़ डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के अपराध तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि कई अन्य विकल्प हैं।

 

डाॅक्टर मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे ईरान के अन्य वैज्ञानिक शहीदों की तरह नहीं थे बल्कि ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू के शब्दों में ईरान के वैज्ञानिक आंदोलन के निर्माता थे। इसी तरह इस हत्या के माध्यम से ईरान की आर्थिक रणनीति की रक्षा को भी निशाना बनाया गया है इस लिए ईरान का जवाब, इसके अनुपात में ही होगा। कुछ टीकाकारों का कहना है कि शहीद डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे का क़द, शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी से कम नहीं था। अमरीका, ज़ायोनी शासन और कुछ अरब देशों ने पिछले साल के दौरान ईरान की शक्ति को सीमित करने की कोशिश की लेकिन हर तरह का दबाव डालने के बावजूद वे नाकाम रहे। डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे उन लोगों में से थे जिन्होंने ईरान को ज़्यादा से ज़्यादा मज़बूत बनाने में अहम योगदान दिया और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस लिए उन्हें शहीद करने के अपराध पर ईरान का जवाब पूरी तरह से क़ानूनी होगा और उसे अपने घटकों से मदद लेने की भी ज़रूरत नहीं है।

 

डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे की शहादत के बाद इस्राईल के एफ़-15 युद्धक विमानों ने लेबनान पर कई बार उड़ान भरी। शायद ज़ायोनी अधिकारियों का विचार है कि ईरान, लेबनान के अंदर से इस अपराध पर प्रतिक्रिया दिखाएगा जबकि यह बात सही नहीं है, ईरान सीधे सीधे जवाब देगा और अगर यह साबित हो गया कि इस अपराध में इस्राईल का हाथ था तो फिर वह दूसरों के हस्तक्षेप के बिना ख़ुद ही सीधे प्रतिक्रिया दिखाएगा। कुछ राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे ईरान के वह पहले वैज्ञानिक नहीं थे, जिन्हें अमरीका व इस्राईल ने शहीद किया बल्कि जबसे ईरान क्षेत्र की अहम ताक़त और दुनिया के परिवर्तनों में प्रभावी भूमिका निभाने वाला देश बना है तब से उसके वैज्ञानिकों पर हमले हो रहे हैं।

 

टीकाकारों का कहना है कि डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे की शहादत की कार्यवाही, इस्राईल के आंतरिक हितों और इसी तरह ज़ायोनी शासन से संबंध स्थापित करने वाले अरब देशों के गठजोड़ के हितों के परिप्रेक्ष्य में अंजाम दी गई है और बहुत ख़तरनाक है क्योंकि इससे ईरान व प्रतिरोध के मोर्चे से टकराने में इस्राईल की कमज़ोरी का पता चलता है। अलबत्ता डाॅक्टर फ़ख़्रीज़ादे की शहादत से विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में ईरान की प्रगति को रोका नहीं जा सकेगा क्योंकि ईरान के हज़ारों छात्र परमाणु विज्ञान सीख रहे हैं। सच्चाई यह है कि ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक डाॅक्टर मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे, आइंस्टाइन की सतह के थे और भविष्य में यह बात स्पष्ट होगी कि वे कौन थे।