अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने एक तरह से अमरीकी समाज में दरार पैदा कर दी और इस दरार ने अमरीका को दो संघर्षरता धड़ों में बांट दिया। ट्रम्प के अनुसार चुनाव परिणामों के बाद अमरीका, आपत्तियों का मैदान बन जाएगा और इन चुनावों का दो ही परिणम होगा, या तो मामला सुप्रीम कोर्ट में जाएगा या फिर अगर नतीजे बराबर रहे तो बात प्रतिननिधि सभा तक पहुंचेगी।
चूंकि डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बाइडन, आठ साल तक ओबामा के काल में उप राष्ट्रपति रहे हैं, इस लिए अमरीकी जनता उन्हें एक अनुभवी व सूझ-बूझ वाले व्यक्ति के रूप में पहचानती है और यह उनका मज़बूत प्वाइंट है। ट्रम्प का मामला इसके बिलकुल विपरीत है और वे ओबामा की सरकार के ख़िलाफ़ जनता के आक्रोश के कारण सत्ता में पहुंचे थे और उन्होंने आंतरिक व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ग़लत नीतियां अपनाईं। उन्होंने अमरीकी समाज में मतभेद पैदा कर दिया और विदेशी मामलों में भी बुद्धिमत्ता से काम नहीं लिया।
ट्रम्प के व्यक्तित्व और उनके राजनैतिक दृष्टिकोणों की समीक्षा से पता चलता है कि वे विश्व समुदाय में स्थिर हालात पैदा नहीं कर सकते। कुछ टीकाकारों का कहना है कि अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव, ट्रम्प के बारे में जनमत संग्रह में बदल गए हैं और उन्होंने अमरीकी समाज में जो दरारें पैदा की हैं उन्होंने इस देश में समरसता व एकजुटता को कमज़ोर किया है और अलगाववाद को बढ़ावा दिया है।
चुनाव में कौन जीतेगा? इसके बारे में समीक्षाएं भिन्न-भिन्न हैं लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि अगर स्थिति इसी तरह जारी रही, जैसी पिछले 72 घंटों में थी तो ट्रम्प जनता के वोटों से कम अंतर से जीत जाएंगे और संभव है कि इलेक्टोरल काॅलेज के वोट उन्हें ज़्यादा संख्या में मिल जाएं। इस समय अमरीका की केंद्रीय सरकार व राज्यों के बीच एकजुटता कमज़ोर दिखाई दे रही है क्योंकि अलगाववादी तत्व भी सामने आने लगे हैं और इस प्रकार की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं कि अमरीकी राज्य एक दूसरे से अलग हो सकते हैं।