10 जनवरी 2016 - 17:14
सऊदी अधिकारी, युद्ध के इच्छुक हैं जबकि ईरान, शांति के लिए प्रयासरत है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि सऊदी अरब के दूतावास पर किया जाने वाले आक्रमण वास्तव में निंदनीय है किंतु इसकी प्रतिक्रिया में की जाने वाली कार्यवाही, तनाव फैलाने वाली है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सऊदी अरब की तनाव बढ़ाने की नीति की निंदा की है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि सऊदी अरब के दूतावास पर किया जाने वाले आक्रमण वास्तव में निंदनीय है किंतु इसकी प्रतिक्रिया में की जाने वाली कार्यवाही, तनाव फैलाने वाली है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सादिक़ हुसैन जाबेरी अंसारी ने शनिवार की रात टीवी चैनल एक कार्यक्रम में कहा कि सऊदी अरब के दूतावास पर कुछ लोगों के हमले का बचाव नहीं किया जा सकता है लेकिन इसके साथ ही तनाव पैदा करने पर आधारित सऊदी अरब की गतिविधियां भी एक वास्तविकता हैं।
सादिक हुसैन जाबेरी अंसारी का कहना था कि ईरान के उच्च अधिकारियों ने तेहरान और मशहद में सऊदी अरब के दूतावास और वाणिज्य दूतावास पर प्रदर्शनकारियों के एक समूह के हमले के बारे में अपनी अप्रसन्नता की घोषणा की लेकिन इसमें भी शक नहीं है कि सऊदी अरब ने हालिया महीनों के दौरान तनाव पैदा करने पर आधारित कार्यवाही करके दुनिया और क्षेत्र के मुसलमानों तथा अलगाववादियों को अधिक उत्तेजित किया है।
जाबेरी अंसारी ने सऊदी अरब के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाह बाक़िर निम्र को मृत्युदंड देने पर आधारित सऊदी सरकार के क़दम की व्यापक निंदा की और कहा कि रेयाज़ इस तरह के कार्यों से उस दलदल से मुक्ति प्राप्त नहीं कर सकता है जिसे वह स्वयं क्षेत्र के देशों विशेषकर यमन में अस्तित्व में लाया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सऊदी अधिकारी, युद्ध के इच्छुक हैं जबकि ईरान, शांति के लिए प्रयासरत है।
जाबेरी अंसारी का कहना था कि इराक़ में सद्दाम सरकार के पतन के बाद सऊदी अरब ने इराक़ में उत्पन्न होने वाली नई लोकतांत्रिक स्थिति को स्वीकार नहीं किया बल्कि उसने इस स्थिति का मुक़ाबला करने की कोशिश की। सऊदी अरब ने आतंकवादी गुटों का समर्थन और क़बाएली मतभेदों को हवा देकर इस स्थिति को बदलने की पूरी कोशिश की किंतु सऊदी अरब के इन सभी उपायों का परिणाम, क्षेत्र में अशांति के रूप में सामने आया।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सऊदी अरब को अभी या बाद में अपने आसपास की स्थिति का अनुमान होगा। इसमें कोई शक नहीं है कि आले सऊद को अपने नए खेल में सफलता प्राप्त नहीं होगी और दूतावास बंद करना न केवल कोई सही बात नहीं है बल्कि इससे उसे कोई लाभ नहीं होगा।