قال الامام الصادق علیه السلام:
أبعَدُ ما یَکونُ العَبدُ مِنَ اللّه أن یَکونَ الرَّجُلُ یُواخی الرَّجُلَ و هُوَ یَحفَظُ (علَیهِ) زَلاّتِهِ لِیُعَیِّرَهُ بِها یَوما ما
الکافی : 7/ 355 /2
इमाम सादिक़ अ.स.
खुदा से सबसे दूर वह बंदा है जो किसी इंसान से भाईचारा बनाए लेकिन उसकी ग़लतियों को अपने पास संजो कर रखे ताकि एक दिन उसके माध्यम से उसकी आलोचना करे।
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