आज 4 शाबान को ज़ैदपुर कस्बे में अंजुमन हुसैनिया रजि. द्वारा रसूले खुदा स.व.स. के नवासे हजरत इमाम हुसैन अ. की मदीने से कर्बला की यात्रा की याद में सफरे इमामे हुसैन अ. का जुलूस बड़े अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। जुलूस की शुरुआत सुबह 9 बजे शिया जामा मस्जिद में आयोजित मजलिसे अजा से हुई, जिसमें मौलाना अली रिजवान साहब ने इमाम हुसैन की मदीने से हिजरत के बारे में खिताब किया।
मौलाना ने इमाम हुसैन की उस ऐतिहासिक हिजरत के महत्व को उजागर करते हुए बताया कि जब यजीद ने इमाम हुसैन से बैअत लेने का आदेश दिया, तो इमाम हुसैन ने इसे नकारते हुए कहा, "मुझ जैसा, उस जैसे की बैअत नहीं कर सकता।" इमाम हुसैन का यह फैसला इस्लाम के सिद्धांतों और मान्यताओं की रक्षा के लिए था, क्योंकि यजीद द्वारा किए गए कार्य इस्लाम की सच्चाई से मेल नहीं खाते थे। इसके बाद, इमाम हुसैन ने अपने नाना के दीन को बचाने और इंसानियत के सुधार के लिए मदीना छोड़कर कर्बला का रुख किया। इस कठिन निर्णय के परिणामस्वरूप कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों ने महान बलिदान दिए।
मजलिस के अंत में इमाम हुसैन के कर्बला में पेश आए मसाएब (दुखद घटनाओं) का वर्णन किया गया, जो सुनकर वहां मौजूद सभी अजादार रो पड़े। उनकी आँखों में गहरी श्रद्धा और प्यार का समुंदर उमड़ पड़ा।
इसके बाद अंजुमन हुसैनिया के तत्वावधान में जुलूस शुरू हुआ, जिसमें अजादारों ने काले कपड़े पहनकर, "या हुसैन" के नारे लगाए और इमाम हुसैन के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। जुलूस में शबीहे जुलजनाह, अमारी, झूला हजरत अली असगर, और अलम मुबारक जैसे प्रतीक चिन्ह भी शामिल थे।
जुलूस के दौरान, अंजुमन हुसैनिया के नौहाख्वान ने अपनी आवाज में दर्द और श्रद्धा के साथ नौहाखानी की, जबकि नवजवान दस्ते ने सीनाजनी और जंजीर का मातम करके अपने साहसिक प्रेम और अकीदत का इज़हार किया। इस पूरे समय के दौरान, अजादारों ने न सिर्फ इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद किया, बल्कि अपने दिलों में उनके विचारों और बलिदान को जीवित रखने की कसम भी खाई।
यह पारंपरिक जुलूस ज़ैदपुर के विभिन्न इलाकों जैसे गढ़ी कदीम, मुख्खिन, बांध चौराहा, पीरपांजू, पचदरी, छोटा इमामबाड़ा, बड़ी सरकार, और बड़ी बाजार से होते हुए थाना चौराहा स्थित शबीहे कर्बला पर समाप्त हुआ, जहां मौलाना सैय्यद मोहम्मद इब्ने अब्बास ने आखिरी खिताब किया और इमाम हुसैन की कुर्बानी की अहमियत को दोहराया।
जुलूस की समाप्ति पर अंजुमन हुसैनिया के ओहदेदारों और सभी सदस्यों ने आए हुए अजादारों का धन्यवाद किया और उन्हें उनके प्यार और श्रद्धा के लिए सराहा। इस दौरान सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात था। जुलूस के रास्ते में पचदरी मस्जिद, गढ़ी जदीद, छोटी बाजार, हीरो मोटरसाइकिल शोरूम जैसी प्रमुख जगहों पर समाजसेवियों ने जुलूस में शामिल अजादारों के लिए सबीले का इंतजाम किया था, जिससे वहां मौजूद लोगों को पानी और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करवाई गईं।
इस जुलूस ने न केवल कर्बला की यादों को ताजा किया, बल्कि इमाम हुसैन की सच्चाई और बलिदान के संदेश को हर दिल तक पहुंचाया। यह एक ऐतिहासिक दिन था, जब सच्चाई और धर्म के प्रति अकीदत ने हर व्यक्ति को एक साथ जोड़ा और इस्लाम की सच्ची शिक्षाओं को याद किया।
