सीरिया के खिलाफ उसके पडोसी देशों के सहयोग से जहाँ एक बार फिर आतंकी साज़िश तेज़ हो गयी है वहीँ भारत ने असद प्रशासन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।
सीरिया में एक बार फिर अमेरिका तुर्की और इस्राईल समर्थित आतंकी गुटों ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है। देश के हलब में युद्ध जैसे हालात हैं, ज़ायोनी लॉबी और साम्राज्यवाद विरोधी सीरियाई राष्ट्रपति असद की सरकार को गिराने की साजिशें की जारी रही हैं। इस बीच भारत और सीरिया के बीच नई दिल्ली में द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने पर चर्चा की गई। भारत और सीरिया के बीच शुक्रवार को दिल्ली में एक अहम बैठक हुई, जिसने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा दी है। पश्चिमी देशों की तरफ से सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद की सरकार को गिराने की साजिशें जहां तेज हैं, वहीं भारत ने अपनी दोस्ती और सहयोग का हाथ बढ़ाकर यह साबित किया है कि उसकी कूटनीति सिर्फ शब्दों की नहीं, बल्कि रिश्तों को गहराई देने की है।
भारत और सीरिया के रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक साझेदारी पर आधारित हैं। पश्चिमी देश लगातार सीरिया पर दबाव बनाने और असद सरकार को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद भारत ने हमेशा सीरिया के साथ निष्पक्षता का रुख अपनाया है।
भारत, सीरिया में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहा है और यहां की युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करने में मदद कर रहा है। इस बैठक में भारत ने सीरिया को आश्वस्त किया कि उसके विकास में भारत एक भरोसेमंद साथी रहेगा।